नए अस्पताल में चूहों द्वारा दवाइयां कुतरने के भास्कर के खुलासे पर शुक्रवार को कार्रवाई करने पहुंची ड्रग डिपार्टमेंट की टीम को कई गंभीर खामियां मिलीं। जांच के दौरान ही एक रोगी दवा लेने आया तो उसे एक काउंटर से दवा दे दी गई। असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र गर्ग ने पर्चा देखकर दवाओं का मिलान किया तो पता चला कि रोगी को उल्टी में यूज होने वाली दवा डॉमपेरीडोन की जगह नींद की दवा क्लोनाजेपाम दे दी गई थी।
क्या हुई कार्रवाई
दवा देख वे चौंके और दवा देने वाले से पूछा तो पता चला कि वह फार्मासिस्ट नहीं बल्कि हेल्पर था। हेल्पर का काम सिर्फ फार्मासिस्ट की मदद करना होता है, दवा देना नहीं। इस पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में वे कार्रवाई के लिए प्रिंसिपल को लिखेंगे। करीब 2 घंटे तक अस्पताल के बाहर बने चारों काउंटरों का जायजा लेकर कागजी कार्रवाई के बाद टीम लौट आई।
मरीजों को हेल्पर के भरोसे छोड़ निश्चिंत बैठे थे फार्मासिस्ट
सही नहीं स्टोरेज की कंडीशन
दवाओं का स्टोरेज भी ढंग से नहीं: ड्रग डिपार्टमेंट की टीम ने प्रथम दृष्ट्या तापमान व अन्य इंतजाम देखने के बाद साफ कर दिया कि काउंटरों पर दवाइयों के स्टोरेज की कंडीशन सही नहीं है। छानबीन शुरू की तो वहां चूहों द्वारा कुतरी गई दवाइयों की स्ट्रिप व सीरप भी मिल गई। मौके पर आए अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि काउंटरों पर ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि किसी भी सूरत में चूहे न घुस पाएं और तापमान भी मेंटेन रहे। अस्पताल प्रशासन ने इसपर काम भी शुरू करवा दिया है।
रोगियों से खिलवाड़, हेल्पर ही देते हैं दवाएं
मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में फार्मासिस्ट्स के साथ काम करने वाले हेल्पर अक्सर दवा देते दिख जाते हैं। नए अस्पताल में सामने आए मामले ने दवा देने के सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए। यह तो संभव नहीं कि पहली बार ही हेल्पर दवा दे रहा होगा और यह भी संभव नहीं कि पहले उसने दवा देने में गलती नहीं की होगी? जाहिर है, इस अव्यवस्था के लिए फार्मासिस्ट जिम्मेदार हैं।
इन्होंने क्या कहा
कोटा जोन के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र गर्ग ने कहा है कि स्टोरेज कंडीशन सही नहीं मिली। हेल्पर दवा दे रहा था, वह भी गलत। हम प्रिंसिपल व अधीक्षक को लिख रहे हैं, क्योंकि कार्रवाई के लिए वे ही अधिकृत हैं।
क्या हुई कार्रवाई
दवा देख वे चौंके और दवा देने वाले से पूछा तो पता चला कि वह फार्मासिस्ट नहीं बल्कि हेल्पर था। हेल्पर का काम सिर्फ फार्मासिस्ट की मदद करना होता है, दवा देना नहीं। इस पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में वे कार्रवाई के लिए प्रिंसिपल को लिखेंगे। करीब 2 घंटे तक अस्पताल के बाहर बने चारों काउंटरों का जायजा लेकर कागजी कार्रवाई के बाद टीम लौट आई।
मरीजों को हेल्पर के भरोसे छोड़ निश्चिंत बैठे थे फार्मासिस्ट
सही नहीं स्टोरेज की कंडीशन
दवाओं का स्टोरेज भी ढंग से नहीं: ड्रग डिपार्टमेंट की टीम ने प्रथम दृष्ट्या तापमान व अन्य इंतजाम देखने के बाद साफ कर दिया कि काउंटरों पर दवाइयों के स्टोरेज की कंडीशन सही नहीं है। छानबीन शुरू की तो वहां चूहों द्वारा कुतरी गई दवाइयों की स्ट्रिप व सीरप भी मिल गई। मौके पर आए अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि काउंटरों पर ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि किसी भी सूरत में चूहे न घुस पाएं और तापमान भी मेंटेन रहे। अस्पताल प्रशासन ने इसपर काम भी शुरू करवा दिया है।
रोगियों से खिलवाड़, हेल्पर ही देते हैं दवाएं
मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में फार्मासिस्ट्स के साथ काम करने वाले हेल्पर अक्सर दवा देते दिख जाते हैं। नए अस्पताल में सामने आए मामले ने दवा देने के सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए। यह तो संभव नहीं कि पहली बार ही हेल्पर दवा दे रहा होगा और यह भी संभव नहीं कि पहले उसने दवा देने में गलती नहीं की होगी? जाहिर है, इस अव्यवस्था के लिए फार्मासिस्ट जिम्मेदार हैं।
इन्होंने क्या कहा
कोटा जोन के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र गर्ग ने कहा है कि स्टोरेज कंडीशन सही नहीं मिली। हेल्पर दवा दे रहा था, वह भी गलत। हम प्रिंसिपल व अधीक्षक को लिख रहे हैं, क्योंकि कार्रवाई के लिए वे ही अधिकृत हैं।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai