कायदे तोड़कर बनाई बिल्डिंग, सारे नियम किए दरकिनार

कायदे तोड़कर बनाई बिल्डिंग, सारे नियम किए दरकिनार

कायदे तोड़कर बनाई बिल्डिंग, सारे नियम किए दरकिनार

12 अप्रैल को निगम कार्यसमिति की बैठक में मेयर और उपायुक्त राजेश डागा के बीच जिस प्लॉट नंबर 311 पर निर्माण की अनुमति देने को लेकर विवाद हुआ उसमें कई खामियां हैं। मेयर इस फाइल को गुपचुप तरीके से पास कराना चाहते हैं। मेयर भले ही पाकसाफ होने का दावा करें, लेकिन इस मामले में सबसे गंभीर बात ये है कि यहां बन रही मल्टीस्टोरी की फाइल ही डुप्लीकेट है।
भास्कर ने की पड़ताल
कोर्ट में मामला और निगम के नीचे के कर्मचािरयों की आपत्ति के बावजूद मेयर इस निर्माण को वैध कराने पर अड़े हैं। इससे उनकी भूमिका पर सीधा सवाल खड़ा होता है। भास्कर ने इस मामले की पड़ताल की तो कई गड़बड़ियां सामने आईं।
कब क्या हुआ
- 7 जुलाई 2014 को प्लॉट पर 4 मंजिल के भवन निर्माण की अनुमति के लिए फाइल लगाई गई थी।
- 29 मार्च 2016 को भवन निर्माण स्वीकृति समिति की बैठक में मेयर ने गुपचुप ढंग से फाइल मंगवाकर पास कर दी। जबकि ये फाइल बैठक के एजेंडे में शामिल ही नहीं थी।
- 12 अप्रैल 2016 को निगम कार्यसमिति की बैठक में भी मेयर ने इस फाइल को अनुमति के लिए रख दिया। उपायुक्त राजेश डागा ने फाइल में खामियां बताकर साइन करने से मना कर दिया था।
- विवाद को देखते हुए आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते ने फाइल अपने पास मंगवाकर रख ली।
- अब हालत ये है कि कोई इस मामले की फाइल दिखाना नहीं चाहता।
मंजूरी से पहले ही बन गई इमारत
मेयर जिस फाइल को पास करवाने के लिए जोर लगा रहे हैं वहां तो पहले से 4 मंजिला इमारत बनकर तैयार है। इसमें कितने नियमों का उल्लंघन हुआ है अंदाजा नहीं। मेयर कह रहे हैं कि भूस्वामी को निगम लंबे समय से इंतजार करवा रहा है। फाइल पास करना गलत नहीं। लेकिन, क्या ऐसा कर वे अवैध निर्माण को बढ़ावा नहीं दे रहे।
मंजूरी के रास्ते पर सरपट दौड़ रही डुप्लीकेट फाइल
इस विवादित मामले की ओरिजनल फाइल भी नगर निगम से चोरी हो चुकी है। निगम अधिकारियों को ये भी शक है कि ओरिजनल फाइल में कोई गंभीर टिप्पणी थी। उपायुक्त अशोक त्यागी के अनुसार जब तक ओरिजनल फाइल की जानकारी नहीं मिल जाती तब तक नियमानुसार डुप्लीकेट फाइल के आधार पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं, मेयर इसके बावजूद निर्माण की इजाजत देने पर अड़े हैं।
डीटीओ और एलओ की रिपोर्ट भी नहीं
इस फाइल पर नियमानुसार डीटीओ और एलओ की रिपोर्ट भी पॉजिटिव नहीं है। नियमानुसार डीटीओ और एलओ की रिपोर्ट के बगैर भवन निर्माण की अनुमति किसी भी हालत में नहीं दी जा सकती। उपायुक्त राजेश डागा के अनुसार एलओ ने नई फाइल बनाने की संस्तुति के अलावा निर्माण को नियमित करने संबंधी कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। इसी वजह से उन्होंने भी फाइल पर साइन करने से मना कर दिया।
कोर्ट में चल रहा है अवैध निर्माण का केस
प्लॉट नंबर 311 के बगल में रहने वाले एक व्यक्ति ने कोर्ट में केस कर रखा है कि यहां अवैध ढंग से निर्माण हो रहा है। कोर्ट में इस मामले को लेकर पेशी भी हो चुकी है। अभी इस पर कोई फैसला नहीं आया है। इसके बावजूद मेयर हठधर्मिता दिखाते हुए इजाजत देने पर आमादा हैं।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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