कोटा यूनिवर्सिटी में दोपहर 2 बजे बाद पीने का पानी खत्म हो जाता है और छात्र गर्मी में प्यासे रहते हैं। एकेडमिक ब्लाॅक में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए कैंपर्स से ही पानी आता है। जो दोपहर 2 बजे तक ही खत्म हो जाता है। वहीं, वुमन सेल की लापरवाही के चलते गर्ल्स काॅमनरूम के भी हाल खराब हैं।
नहीं हुआ कोई सुधार
यहां बैठने, पानी और कूलर की व्यवस्थाएं नहीं हैं। इसके चलते अधिकतर समय यह बंद ही रहता है। इसकी वजह से 40 डिग्री तापमान में भी हमारी बेटियों को कभी गैलरी तो कभी पार्किंग में खड़े होकर समय बिताना पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी ने करीब डेढ़ महीने पहले इसको सही तरीके से शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ। उलटा कमरे में धूल मिट्टी जम गई है। खासबात यह है कि यूनिवर्सिटी में छात्राओं की सुरक्षा और सुविधाओं के वुमन सेल भी बना हुआ है। यह सेल बस कुछ आयोजन करके अपनी वास्तविक जिम्मेदारियों से पीछे हट जाता है।
दोपहर बाद तरसते हैं पानी को
दोपहर बाद पीने के लिए एक भी बूंद पानी न होने के चलते विद्यार्थी परेशान रहते है। कैंपर्स का पानी ही एकमात्र सहारा है। यह कैंपर्स भी दोपहर बाद खत्म हो जाते है। इस कारण तपती धूप में बच्चों का जल मंदिर तक जाना पड़ता है।
डेढ़ महीने से सिर्फ चल रही है फाइल
छात्राओं के प्रति संवेदनहीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गर्ल्स कॉमन रूम की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की फाइल डेढ़ महीने से चल ही रही है। वूमन सेल का दावा था कि इसकाे मार्च में शुरू कर दिया जाएगा। मामला अप्रैल मध्य तक आ पहुंचा है, लेकिन बेटियों को राहत नहीं मिली।
औपचारिकताओं के कारण हो रही है देरी
कोटा यूनिवर्सिटी के वूमन सेल के कंवीनर प्रो. आशुरानी ने कहा है कि फाइल चला रखी है। बीच में रजिस्ट्रार छुट्टी पर थे। इस कारण देरी हो गई है। पर्दों सहित अन्य चीजों की डिमांड भेजी जा चुकी है। औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही है। क्लासरूम में भी कूलर की व्यवस्था नहीं है। लेकिन, यह गर्ल्स कॉमन रूम है, इसीलिए देखते हैं क्या किया जा सकता है।
नहीं हुआ कोई सुधार
यहां बैठने, पानी और कूलर की व्यवस्थाएं नहीं हैं। इसके चलते अधिकतर समय यह बंद ही रहता है। इसकी वजह से 40 डिग्री तापमान में भी हमारी बेटियों को कभी गैलरी तो कभी पार्किंग में खड़े होकर समय बिताना पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी ने करीब डेढ़ महीने पहले इसको सही तरीके से शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ। उलटा कमरे में धूल मिट्टी जम गई है। खासबात यह है कि यूनिवर्सिटी में छात्राओं की सुरक्षा और सुविधाओं के वुमन सेल भी बना हुआ है। यह सेल बस कुछ आयोजन करके अपनी वास्तविक जिम्मेदारियों से पीछे हट जाता है।
दोपहर बाद तरसते हैं पानी को
दोपहर बाद पीने के लिए एक भी बूंद पानी न होने के चलते विद्यार्थी परेशान रहते है। कैंपर्स का पानी ही एकमात्र सहारा है। यह कैंपर्स भी दोपहर बाद खत्म हो जाते है। इस कारण तपती धूप में बच्चों का जल मंदिर तक जाना पड़ता है।
डेढ़ महीने से सिर्फ चल रही है फाइल
छात्राओं के प्रति संवेदनहीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गर्ल्स कॉमन रूम की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की फाइल डेढ़ महीने से चल ही रही है। वूमन सेल का दावा था कि इसकाे मार्च में शुरू कर दिया जाएगा। मामला अप्रैल मध्य तक आ पहुंचा है, लेकिन बेटियों को राहत नहीं मिली।
औपचारिकताओं के कारण हो रही है देरी
कोटा यूनिवर्सिटी के वूमन सेल के कंवीनर प्रो. आशुरानी ने कहा है कि फाइल चला रखी है। बीच में रजिस्ट्रार छुट्टी पर थे। इस कारण देरी हो गई है। पर्दों सहित अन्य चीजों की डिमांड भेजी जा चुकी है। औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही है। क्लासरूम में भी कूलर की व्यवस्था नहीं है। लेकिन, यह गर्ल्स कॉमन रूम है, इसीलिए देखते हैं क्या किया जा सकता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai