हम यहां अपने ही कैंपस में कैदी की तरह रह रहे हैं। 7 दिन हो गए, बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। हम खुद भी नहीं जा सकते, क्योंकि सुरक्षित नहीं हैं। कैंपस में भी हम अपने हॉस्टल एरिया तक सीमित हैं, इससे बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। सिर्फ बैठकें चल रही हैं, नतीजा कुछ नहीं निकल रहा। यह कहना है श्रीनगर एनआईटी में फंसे कोटा के स्टूडेंट्स का।
स्टूडेंट्स ने बताया कि गुरुवार को सुबह से शाम तक करीब 11 घंटे तक एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के अधिकारियों के साथ बैठकें चलीं। अब हम सिर्फ एक मांग पर अड़े हुए हैं कि हमें किसी भी तरह यहां से निकालो और दूसरी एनआईटी में शिफ्ट करो। क्योंकि अब हमारा यहां रहना खतरे से खाली नहीं। पूरा कश्मीर हमारे खिलाफ हो चुका है, लेकिन इस पर एमएचआरडी टीम कोई निर्णय नहीं कर पा रही।
जानबूझकर उड़ाई जा रही अफवाहें, स्टूडेंट्स ने किया खंडन
पहले बुधवार को भी बैठक हुई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। गुरुवार को यहां के डिप्टी सीएम के आने की सूचना थी, लेकिन वे नहीं आए। अब तो बाजार में अफवाहें और फैलाई जा रही हैं कि हम यहां मंदिर बनवाना चाहते हैं। जबकि ऐसी कोई बात कभी किसी गैर कश्मीरी स्टूडेंट ने नहीं की। हमने प्रोटेस्ट के हमारे ऑफिशियल फेसबुक पेज पर भी इसका खंडन किया है। स्टूडेंट्स का दावा है कि प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में मुस्लिम स्टूडेंट भी शामिल हैं। इनमें कोटा का भी एक स्टूडेंट है।
क्लासें चल रहीं, हम नहीं जा रहे
एनआईटी में क्लासें चल रही हैं। कश्मीरी स्टूडेंट्स पढ़ने भी जा रहे हैं, लेकिन आंदोलनरत गैर कश्मीरी स्टूडेंट इन क्लासों में नहीं जा रहे। आगामी कुछ दिनों में टेस्ट भी होने हैं, उनके भी बहिष्कार का निर्णय किया है। मांगे मानने तक आंदोलन जारी रहेगा।
स्टूडेंट्स ने बताया कि गुरुवार को सुबह से शाम तक करीब 11 घंटे तक एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के अधिकारियों के साथ बैठकें चलीं। अब हम सिर्फ एक मांग पर अड़े हुए हैं कि हमें किसी भी तरह यहां से निकालो और दूसरी एनआईटी में शिफ्ट करो। क्योंकि अब हमारा यहां रहना खतरे से खाली नहीं। पूरा कश्मीर हमारे खिलाफ हो चुका है, लेकिन इस पर एमएचआरडी टीम कोई निर्णय नहीं कर पा रही।
जानबूझकर उड़ाई जा रही अफवाहें, स्टूडेंट्स ने किया खंडन
पहले बुधवार को भी बैठक हुई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। गुरुवार को यहां के डिप्टी सीएम के आने की सूचना थी, लेकिन वे नहीं आए। अब तो बाजार में अफवाहें और फैलाई जा रही हैं कि हम यहां मंदिर बनवाना चाहते हैं। जबकि ऐसी कोई बात कभी किसी गैर कश्मीरी स्टूडेंट ने नहीं की। हमने प्रोटेस्ट के हमारे ऑफिशियल फेसबुक पेज पर भी इसका खंडन किया है। स्टूडेंट्स का दावा है कि प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में मुस्लिम स्टूडेंट भी शामिल हैं। इनमें कोटा का भी एक स्टूडेंट है।
क्लासें चल रहीं, हम नहीं जा रहे
एनआईटी में क्लासें चल रही हैं। कश्मीरी स्टूडेंट्स पढ़ने भी जा रहे हैं, लेकिन आंदोलनरत गैर कश्मीरी स्टूडेंट इन क्लासों में नहीं जा रहे। आगामी कुछ दिनों में टेस्ट भी होने हैं, उनके भी बहिष्कार का निर्णय किया है। मांगे मानने तक आंदोलन जारी रहेगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai