कंधे पर स्कूल बैग और गलियों, बाजारों में घूमते बच्चे। आपको अपने आस-पास ऐसे कई स्कूली छात्र घूमते नजर आ जाएंगे। मासूमियत ऐसी कि सोच भी नहीं सकते कि इनमें से कोई बच्चा चोरी या लूट जैसी वारदात भी कर सकता है। इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता इसलिए पुलिस भी इन पर शक नहीं कर सकती।
नाबालिग के पकड़े जाने पर उनके विरुद्ध कोई सख्त कार्यवाही भी नहीं होती क्योंकि पुलिस उन्हें सिर्फ निरुद्ध करवा सकती है। इसी का फायदा उठाकर शातिर अपराधी अब अपनी गैंग में बच्चों को शामिल कर रहे हैं। मार्च से अप्रैल के बीच वाहन चोरी की वारदातों में 13 बच्चे गिरफ्तार किए गए। केवल 200 या 500 जैसी छोटी रकम के लिए ये कच्ची उम्र के ये बच्चे चोरी, लूट, हत्या और डकैती जैसी संगीन वारदातें करने से भी नहीं चूकते। 2012 में एक व्यापारी से लूट की वारदात में तो नाबालिग आरोपी ने फायरिंग तक कर दी थी।
पुलिस भी नहीं करती शक
500 के लिए बनाई नाबालिगों की गैंग
उद्योग नगर पुलिस ने फरवरी 2016 में बाइक चोरी करने वाली एक गैंग का पर्दाफाश किया। जब 14 आरोपियों में 9 नाबालिग निकले तो खुद पुलिस आश्चर्य में पड़ गई। पुलिस ने उनसे चोरी की 5 बाइकें, 5 कंप्यूटर, एलईडी, एटीएम कार्ड बरामद किए। 10 से 16 साल के ये बच्चे सिर्फ 200 से 500 रुपए के लिए चोरी करते थे।
स्कूल बैग टांगकर करते थे चोरियां
दादाबाड़ी पुलिस ने मार्च 2016 में दो नाबालिगों से चोरी की 9 बाइक बरामद की। दोनों की उम्र 15 व 16 साल थी, जिनमें एक कक्षा 8वीं का छात्र था। ये स्कूल बैग टांगकर स्कूल, अस्पताल, बस स्टेंड, व्यस्त बाजारों की पार्किंग से चोरियां करते ताकि किसी को शक न हो। दोनों ने गुमानपुरा, विज्ञान नगर, नयापुरा व रामपुरा में कई बाइक चोरी की वारदातें कबूली।
गैंग में निभाया अहम रोल
गुमानपुरा पुलिस ने मार्च 2016 में बाइक चोरी की गैंग का पर्दाफाश करके 5 को गिरफ्तार किया। गैंग में एक नाबालिग ने अहम रोल निभाया। इनके पास से पुलिस ने 13 बाइक, 6 देशी पिस्टल, 2 कारतूस बरामद की। बाइकें गुमानपुरा, उद्योगनगर, कैथून, अंता से चुराना कबूला।
8 बाइक बरामद, 4 हजार में बेच देते
उद्योगनगर पुलिस ने बुधवार को दो वाहन चोर पकड़े। इसमें नाबालिग भी शामिल था, जिससे पुलिस ने 8 बाइक बरामद की। दोनों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला। पूछताछ में पता चला कि 3 से 4 हजार रुपए में बाइक बेच देते हैं।
पैसे की डिमांड बना रही अपराधी
सोशल मीडिया, गर्लफ्रेंड, महंगे शौक, बच्चों को इस दिशा में धकेल रही है। वाहन चोरी में शामिल नाबालिगों की केस स्टडी में मैंने खुद महसूस किया की बच्चे नहीं सोचते कि अपराध कितना बड़ा और कैसा है? उन्हें तो सिर्फ पैसे से मतलब होता है। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता। इसलिए ये आसानी से पकड़ नहीं आते ।
- अनंत कुमार, एएसपी
समाज व परिवार ही रोक सकता है
चार परिस्थितियों में बच्चे अपराध करते हैं। पहले- जो स्कूल नहीं गए या जिन पर परिजनों का कंट्रोल नहीं है। दूसरे- जो कम उम्र में बुरी लत के शिकार हो गए। तीसरे- एंटी सोशल पर्सनालिटी यानी उनमें ऐसा करने के लक्षण पहले से मौजूद है। चौथे- वे जो आधुनिकता की दौड़ में खुद को कमजोर समझते हैं। इन्हें समाज और परिवार ही रोक सकता है।
- डॉ. विनोद दड़िया, मनोचिकित्सक
चार परिस्थितियों में बच्चे अपराध करते हैं। पहले- जो स्कूल नहीं गए या जिन पर परिजनों का कंट्रोल नहीं है। दूसरे- जो कम उम्र में बुरी लत के शिकार हो गए। तीसरे- एंटी सोशल पर्सनालिटी यानी उनमें ऐसा करने के लक्षण पहले से मौजूद है। चौथे- वे जो आधुनिकता की दौड़ में खुद को कमजोर समझते हैं। इन्हें समाज और परिवार ही रोक सकता है।
- डॉ. विनोद दड़िया, मनोचिकित्सक
नाबालिग के पकड़े जाने पर उनके विरुद्ध कोई सख्त कार्यवाही भी नहीं होती क्योंकि पुलिस उन्हें सिर्फ निरुद्ध करवा सकती है। इसी का फायदा उठाकर शातिर अपराधी अब अपनी गैंग में बच्चों को शामिल कर रहे हैं। मार्च से अप्रैल के बीच वाहन चोरी की वारदातों में 13 बच्चे गिरफ्तार किए गए। केवल 200 या 500 जैसी छोटी रकम के लिए ये कच्ची उम्र के ये बच्चे चोरी, लूट, हत्या और डकैती जैसी संगीन वारदातें करने से भी नहीं चूकते। 2012 में एक व्यापारी से लूट की वारदात में तो नाबालिग आरोपी ने फायरिंग तक कर दी थी।
पुलिस भी नहीं करती शक
500 के लिए बनाई नाबालिगों की गैंग
उद्योग नगर पुलिस ने फरवरी 2016 में बाइक चोरी करने वाली एक गैंग का पर्दाफाश किया। जब 14 आरोपियों में 9 नाबालिग निकले तो खुद पुलिस आश्चर्य में पड़ गई। पुलिस ने उनसे चोरी की 5 बाइकें, 5 कंप्यूटर, एलईडी, एटीएम कार्ड बरामद किए। 10 से 16 साल के ये बच्चे सिर्फ 200 से 500 रुपए के लिए चोरी करते थे।
स्कूल बैग टांगकर करते थे चोरियां
दादाबाड़ी पुलिस ने मार्च 2016 में दो नाबालिगों से चोरी की 9 बाइक बरामद की। दोनों की उम्र 15 व 16 साल थी, जिनमें एक कक्षा 8वीं का छात्र था। ये स्कूल बैग टांगकर स्कूल, अस्पताल, बस स्टेंड, व्यस्त बाजारों की पार्किंग से चोरियां करते ताकि किसी को शक न हो। दोनों ने गुमानपुरा, विज्ञान नगर, नयापुरा व रामपुरा में कई बाइक चोरी की वारदातें कबूली।
गैंग में निभाया अहम रोल
गुमानपुरा पुलिस ने मार्च 2016 में बाइक चोरी की गैंग का पर्दाफाश करके 5 को गिरफ्तार किया। गैंग में एक नाबालिग ने अहम रोल निभाया। इनके पास से पुलिस ने 13 बाइक, 6 देशी पिस्टल, 2 कारतूस बरामद की। बाइकें गुमानपुरा, उद्योगनगर, कैथून, अंता से चुराना कबूला।
8 बाइक बरामद, 4 हजार में बेच देते
उद्योगनगर पुलिस ने बुधवार को दो वाहन चोर पकड़े। इसमें नाबालिग भी शामिल था, जिससे पुलिस ने 8 बाइक बरामद की। दोनों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला। पूछताछ में पता चला कि 3 से 4 हजार रुपए में बाइक बेच देते हैं।
पैसे की डिमांड बना रही अपराधी
सोशल मीडिया, गर्लफ्रेंड, महंगे शौक, बच्चों को इस दिशा में धकेल रही है। वाहन चोरी में शामिल नाबालिगों की केस स्टडी में मैंने खुद महसूस किया की बच्चे नहीं सोचते कि अपराध कितना बड़ा और कैसा है? उन्हें तो सिर्फ पैसे से मतलब होता है। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता। इसलिए ये आसानी से पकड़ नहीं आते ।
- अनंत कुमार, एएसपी
समाज व परिवार ही रोक सकता है
चार परिस्थितियों में बच्चे अपराध करते हैं। पहले- जो स्कूल नहीं गए या जिन पर परिजनों का कंट्रोल नहीं है। दूसरे- जो कम उम्र में बुरी लत के शिकार हो गए। तीसरे- एंटी सोशल पर्सनालिटी यानी उनमें ऐसा करने के लक्षण पहले से मौजूद है। चौथे- वे जो आधुनिकता की दौड़ में खुद को कमजोर समझते हैं। इन्हें समाज और परिवार ही रोक सकता है।
- डॉ. विनोद दड़िया, मनोचिकित्सक
चार परिस्थितियों में बच्चे अपराध करते हैं। पहले- जो स्कूल नहीं गए या जिन पर परिजनों का कंट्रोल नहीं है। दूसरे- जो कम उम्र में बुरी लत के शिकार हो गए। तीसरे- एंटी सोशल पर्सनालिटी यानी उनमें ऐसा करने के लक्षण पहले से मौजूद है। चौथे- वे जो आधुनिकता की दौड़ में खुद को कमजोर समझते हैं। इन्हें समाज और परिवार ही रोक सकता है।
- डॉ. विनोद दड़िया, मनोचिकित्सक
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai