टिपटा स्थित गढ़ पैलेस के भीममहल में रविवार को अलग ही नजारा रहा। यहां तबले की तिरकिट और हारमोनियम की मधुर स्वर लहरियां श्रोताओं को बरबस अपनी ओर खींच रहीं थी। मौका था, राव माधोसिंह ट्रस्ट संग्रहालय की ओर से अायोजित सालाना शास्त्रीय संगीत प्रोग्राम का।
एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी
पटियाला घराने के गायक उस्ताद जवाद अली खान, उस्ताद मजहर अली खान बंधुओं ने संगीत में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। उन्होंने ठुमरी में ...आए ना बालम याद पिया की आए... बंदिशें सुनाकर भीममहल को स्वरों से गूंजा दिया। देश भक्ति के रंग में... केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देस... की मांड गायन सुनाया।
धौलपुरी ने संगत की
तबले पर उस्ताद इदरीश खान और हारमोनियम पर पद्मश्री उस्ताद महमूद धौलपुरी के बेटे जाकिर धौलपुरी ने संगत की। ट्रस्ट संग्रहालय अध्यक्ष एवं पूर्व महाराव बृजराजसिंह ने कलाकारों का सम्मान किया। म्यूजियम क्यूरेटर आशुतोष दाधीच ने बताया कि आयोजन में पूर्व राजपरिवार से पूर्व महारानी उत्तरादेवी, पूर्व सांसद इज्यराजसिंह, पूर्व युवरानी कल्पना देवी के अलावा पलायथा, पालकिया, खेड़ली, राजगढ़, कुन्हाड़ी, बोरदा, खटकड़ के पूर्व ठिकानेदार, कवि अंबिकादत्त चतुर्वेदी, समाजसेवी तरुमीतसिंह बेदी मौजूद रहे।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai