माता-पिता को खो देने का वज्रपात, फिर भी बेटे ने करवाया दोनों का नेत्रदान

माता-पिता को खो देने का वज्रपात, फिर भी बेटे ने करवाया दोनों का नेत्रदान

माता-पिता को खो देने का वज्रपात, फिर भी बेटे ने करवाया दोनों का नेत्रदान

 सड़क दुर्घटना में माता-पिता को एक साथ खोने पर हुए वज्रपात के बावजूद पिता की देशसेवा को देखते हुए पुत्र ने उनके नेत्रदान का फैसला लिया। जिस समय ये फैसला लिया उस समय दोनों शवों का पोस्टमार्टम हो रहा था।
उनकी भावनाओं को देखते हुए मेडिकल ज्यूरिस्ट ने भी पोस्टमार्टम रोक दिया। नेत्रदान लेने वाली टीम ने पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की उसके बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी हो सकी।
नेत्रदान की बात सुन रोक दिया पोस्टमार्टम
सेना में सूबेदार सूर्यप्रकाश शर्मा अपनी पत्नी शशिप्रभा के साथ बुधवार की रात को नेहरू गार्डन के पास पैदल ही घूमने गए थे। उसी दौरान एक बेकाबू कार ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल दोनों पति-पत्नी की रात को इलाज के दौरान देर रात एमबीएस अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। गुरुवार की सुबह उनका पोस्टमार्टम करवाया जा रहा था।
तभी उनके पुत्र अभिषेक ने कहा कि पिता ने हमेशा से देशसेवा की है। उनके नेत्रदान हो जाएं तो ये भी सेवा ही होगी। ये बात सुनकर राजाराम कर्मयोगी संस्था के राजाराम जैन ने पोस्टमार्टम कर रहे डॉ. सुरेंद्र मीणा से बात की। उन्होंने पोस्टमार्टम की कार्रवाई रोक दी। नेत्रदान के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ को सूचना दी। फाउंडेशन के तकनीशियन टिंकू ओझा व एमबीएस के नर्सिंग स्टाफ महेंद्र यादव ने नेत्रदान लिए।
ताबूत व अन्य सामग्री निशुल्क उपलब्ध करवाई सूर्यप्रकाश मूलरूप से यूपी के मैनपुरी के रहने वाले थे। इसलिए उनके पुत्र द्वारा माता-पिता के शव अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव ले जाए गए। शव ले जाने के लिए दो ताबूत, पॉलीथिन व अन्य सामग्री राजाराम कर्मयोगी सेवा संस्थान की ओर से निशुल्क उपलब्ध करवाई गई।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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