इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (आईएल) को बंद करने की तैयारी अंतिम दौर में है। राज्य सरकार इसे चलाने से पहले ही हाथ खड़े कर चुकी और अब केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री अनंत गीते के चार दिन पुराने एक पत्र से यह मंशा भी साफ हो गई कि वह इस उद्योग को चलाने के इच्छुक नहीं हैं।
एक अर्द्धशासकीय पत्र (डीओ लैटर) गीते ने कोटा के सांसद ओम बिरला को 10 फरवरी को लिखा है, जिसकी प्रति भास्कर के पास है। अभी यह पत्र बिरला तक नहीं पहुंचा है। इसमें उन्होंने साफ कहा है कि उनका मंत्रालय आईएल के सारे विकल्पों पर प्रयास कर चुका। ज्वाइंट वेंचर, पीपीपी मॉडल और बीएचईएल (भेल) में विलय जैसे विकल्पों पर काम किया है, लेकिन कोई भी विकल्प उपयोगी साबित नहीं हो रहा।
हालांकि पत्र में यह भी कहा है कि उन्होंने राजस्थान की मुख्यमंत्री को इसे टेकओवर करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अभी उनका जवाब लंबित है। बिरला ने 18 दिसंबर, 2015 को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान आईएल का मुद्दा उठाया था, मंत्री की यह चिट्ठी उसी का जवाब है।
केंद्रीय उद्योग मंत्री से पहले प्रदेश के मुख्य सचिव भी मना कर चुके हैं चलाने से
आईएल को बचाने के लिए कोटा शहरवासी आंदोलन की राह पर हैं। इसे लेकर मंगलवार को आईएल गेट पर बड़ा आंदोलन किया जा रहा है और शहरवासियों का कहना है कि वे इसे लेकर लंबी लड़ाई को तैयार हैं। ट्रेड यूनियनों में इसे लेकर जबर्दस्त आक्रोश है। अब मौजूदा स्थिति से यह साफ हो चुका है कि इस उद्योग के संचालन की गेंद सिर्फ प्रधानमंत्री और राज्य की मुख्यमंत्री के पाले में हैं। क्योंकि दोनों ही सरकारों के मंत्रालय इस उद्योग को चलाने को इच्छुक नहीं हैं।
आईएल को लेकर होने वाली सरकारी बैठकों में इसके रिवाइवल जैसे मुद्दों पर कम और बंद करने के विकल्पों पर ज्यादा चर्चा हो रही है। दिसंबर में राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक में पहुंचे आईएल प्रबंधन के अधिकारियों का प्रजेंटेशन तो राज्य के अधिकारियों ने ठीक से देखा तक नहीं और इससे पहले ही यह निर्णय दे दिया कि राज्य सरकार इस उद्योग को चलाने में सक्षम नहीं है।
शांतिपूर्ण आंदोलन आज
आईएल कर्मियों की ओर से मंगलवार को आईएल गेट पर आंदोलन किया जाएगा। इस प्रदर्शन को व्यापारिक, सामाजिक, राजनीतिक, पेट्रोलियम डीलर्स के अलावा श्रम संगठनों ने भी समर्थन दिया है।
एक अर्द्धशासकीय पत्र (डीओ लैटर) गीते ने कोटा के सांसद ओम बिरला को 10 फरवरी को लिखा है, जिसकी प्रति भास्कर के पास है। अभी यह पत्र बिरला तक नहीं पहुंचा है। इसमें उन्होंने साफ कहा है कि उनका मंत्रालय आईएल के सारे विकल्पों पर प्रयास कर चुका। ज्वाइंट वेंचर, पीपीपी मॉडल और बीएचईएल (भेल) में विलय जैसे विकल्पों पर काम किया है, लेकिन कोई भी विकल्प उपयोगी साबित नहीं हो रहा।
हालांकि पत्र में यह भी कहा है कि उन्होंने राजस्थान की मुख्यमंत्री को इसे टेकओवर करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अभी उनका जवाब लंबित है। बिरला ने 18 दिसंबर, 2015 को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान आईएल का मुद्दा उठाया था, मंत्री की यह चिट्ठी उसी का जवाब है।
केंद्रीय उद्योग मंत्री से पहले प्रदेश के मुख्य सचिव भी मना कर चुके हैं चलाने से
आईएल को बचाने के लिए कोटा शहरवासी आंदोलन की राह पर हैं। इसे लेकर मंगलवार को आईएल गेट पर बड़ा आंदोलन किया जा रहा है और शहरवासियों का कहना है कि वे इसे लेकर लंबी लड़ाई को तैयार हैं। ट्रेड यूनियनों में इसे लेकर जबर्दस्त आक्रोश है। अब मौजूदा स्थिति से यह साफ हो चुका है कि इस उद्योग के संचालन की गेंद सिर्फ प्रधानमंत्री और राज्य की मुख्यमंत्री के पाले में हैं। क्योंकि दोनों ही सरकारों के मंत्रालय इस उद्योग को चलाने को इच्छुक नहीं हैं।
आईएल को लेकर होने वाली सरकारी बैठकों में इसके रिवाइवल जैसे मुद्दों पर कम और बंद करने के विकल्पों पर ज्यादा चर्चा हो रही है। दिसंबर में राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक में पहुंचे आईएल प्रबंधन के अधिकारियों का प्रजेंटेशन तो राज्य के अधिकारियों ने ठीक से देखा तक नहीं और इससे पहले ही यह निर्णय दे दिया कि राज्य सरकार इस उद्योग को चलाने में सक्षम नहीं है।
शांतिपूर्ण आंदोलन आज
आईएल कर्मियों की ओर से मंगलवार को आईएल गेट पर आंदोलन किया जाएगा। इस प्रदर्शन को व्यापारिक, सामाजिक, राजनीतिक, पेट्रोलियम डीलर्स के अलावा श्रम संगठनों ने भी समर्थन दिया है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai