हनुमनथप्पा की तरह हराधन ने भी किया था बर्फ से संघर्ष

हनुमनथप्पा की तरह हराधन ने भी किया था बर्फ से संघर्ष

हनुमनथप्पा की तरह हराधन ने भी किया था बर्फ से संघर्ष

 देशवासियों की दुआएं हनुमनथप्पा के काम नहीं आ सकीं। गुरुवार दोपहर लांसनायक ने अंतिम सांस ली। देश की रक्षा के लिए हमारे जवान कैसी विषम परिस्थितियों में रहते हैं, यह हादसा इसकी बानगी है। आज भले ही हनुमनथप्पा हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन 54 साल पहले ऐसे ही एक हादसे के गवाह आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। आज शारीरिक विकृतियों के साथ वह जिंदा हैं। ये हैं भारतीय सेना के जवान हराधन मित्रा, जो वर्तमान में 92 वर्ष के हैं।

इस संबंध में जब राजस्थान पत्रिका को जानकारी मिली तो उनसे हादसे के बारे में जानने पहुंचे। बड़ी न्यूरोसर्जरी से गुजरने के बाद भी 92 वर्ष की उम्र में बहुत कुछ याद करने की कोशिश की। कुछ जवाब मिले, कुछ सवाल अधूरे रहे, लेकिन हादसा हनुमनथप्पा से बहुत मिलता जुलता है।

यह है आपबीती

पत्रिका के सवालों से अतीत में जाते हुए हराधन ने बताया कि वर्ष और दिन मुझे अब अच्छी तरह याद नहीं रहा। संभवत: 1962 का मामला है। चीन युद्ध की बात है। मैं श्रीनगर में नायब सूबेदार के पद पर तैनात था। मैं और पायलट हेलीकॉप्टर से सीमा पर नजर रखने व सरहद पर सामान पहुंचाने के लिए पेट्रोलिंग कर रहे थे। तभी चारों तरफ घनी बर्फ में श्रीनगर से कुछ आगे अचानक हेलीकॉप्टर में खराबी आ गई और क्रेश हो गया। हमारा हेलीकॉप्टर खाई में जा गिरा। जब होश आया तो हेलीकॉप्टर की खिड़की तोड़कर� मुझे बाहर खींचा जा रहा था। देखा तो हेलीकॉप्टर बर्फ में दब गया था। पूरी तरह से चकनाचूर हो चुका था। पायलट की मौके पर मौत हो गई थी। बताया गया कि मैं करीब 24 घंटे बर्फ में दबा रहा।

जूते-परेड माफ

मुम्बई में इलाज के बाद कुछ राहत मिली और पैर फिर से काम करने लगे। इसके बाद बेंगलूरु रहा, वहां मुझे परेड और जूते पहनने से छूट दी गई। हादसे के दो साल बाद तक मैंने जूते नहीं पहने। परेड के लिए भी मुझसे नहीं कहा जाता था।

घर का हाल

हराधन के 8 बेटे और 2 बेटियां हैं। पुत्र ने बताया कि हम मूलरूप से कोलकाता बैरकपुर के निवासी हैं। तब हिमाचल में रहते थे। हादसे के तीन महीने बाद हमें इसकी जानकारी मिली। उस समय संचार के माध्यम बहुत कम थे। जहां तक मिलने की बात है करीब एक साल बाद परिवार उनसे मिल सका। पुत्र राममोहन मित्रा ने बताया कि पिता आज भी हमें परिस्थितियों से हार नहीं मानने की सीख देते हैं।

दो दिन पहले जन्मदिन

हराधन मित्रा का दो दिन पूर्व जन्मदिन निकला है। उनका जन्म 10 फरवरी 1924 को हुआ। 18 वर्ष की उम्र में वह ब्रिटिश सेना में भर्ती हो गए। 10 फरवरी 1942 को उन्होंने सेना में ज्वाइनिंग दी। आजादी के बाद वह भारतीय सेना के सिपाही हो गए। 28 साल की सेवाओं के बाद 1970 में सेना से सेवानिवृत्ति ली। इस दौरान 8 हजार फीट हाइट वाले नॉर्थ ईस्ट से लेकर श्रीनगर, बेंगलूरु में सेवाएं दी। सरकार ने कई मैडल भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रपति पत्र से भी सम्मानित किया गया।

बर्फ का दर्द अभी तक

हराधन ने बताया कि इसके बाद मेरा इलाज शुरू हुआ। श्रीनगर से प्लेन से मुझे जम्मू लाया गया। यहां� कुछ दिन इलाज के बाद दिल्ली ले जाया गया। जहां सिर का बड़ा ऑपरेशन हुआ। पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ। पैरों में अकडऩ बरकरार रही। इसके बाद मुम्बई जांच की गई। डॉक्टरों ने पैर काटने के लिए पूछा भी तो मैंने मना कर दिया। आज भी सर्दी में पैरों में सूजन आ जाती है। दोनों पैरों में दर्द रहता है। दवाएं चल रही हैं। बर्फ की गलन से एक हाथ के नाखून और चमड़ी जुड़ गई है। नाखून कट नहीं पाते।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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