कभी शहर को संवारने के लिए पैसे देती थी आईएल, अब हालत देख रोना आता है

कभी शहर को संवारने के लिए पैसे देती थी आईएल, अब हालत देख रोना आता है

कभी शहर को संवारने के लिए पैसे देती थी आईएल, अब हालत देख रोना आता है

 आईएल को घाटे से उबारने के लिए कभी किसी सरकार ने गंभीरता से सोचा ही नहीं। न केंद्र सरकार ने और न राज्य सरकार ने। वर्ष 1993 में आईएल को रुग्ण या बीमारू इकाई घोषित कर दिया गया था, उसी साल पहली बार इसके रिवाइवल के लिए प्लान भेजा गया।

इस प्लान को 1999 में सरकार ने मंजूर किया, लेकिन 6 साल का विलंब होने से इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं रही और सरकार ने इसे खारिज करते हुए नए सिरे से मोडिफाइड रिवाइज्ड प्लान मांगा। इस प्लान को 2009 में मंजूर किया गया, जिसमें करीब 600 करोड़ रुपए का प्रावधान था। लेकिन, सरकार ने इसमें जयपुर के सीतापुरा और मालवीय नगर की जमीनों की बिक्री से प्रस्तावित आय को भी शामिल कर लिया। हालांकि बाद में यह जमीनें बिक नहीं पाई, न ही भारत सरकार ने इन्हें बेचने की अनुमति दी। इनके कन्वर्जन संबंधी दिक्कतें भी आड़े आई।
ऐसे में कंपनी को उस वक्त नकदी के रूप में मात्र 40 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी मिली और बैंकों की बड़ी देनदारियां चुक पाई। यह वो समय था, जब कंपनी को फिर से पूरी क्षमता से चलाने के लिए बड़ी वर्किंग कैपिटल की जरूरत थी, लेकिन एकमुश्त इतना पैसा नहीं मिल पाया।
भारत सरकार की ओर से यह पहली और आखिरी मदद थी, तब से अब तक कोई पैकेज नहीं दिया और अब स्थितियां कंपनी के क्लोजर तक पहुंच गई।
सैलेरी सपोर्ट में भी रोड़ा

समय-समय पर सरकार ने सैलेरी सपोर्ट जरूर दिया, लेकिन वह भी रुला-रुलाकर। अक्टूबर, 2015 तक के 73 करोड़ रुपए का सैलेरी सपोर्ट मिलना था। भारी उद्योग मंत्रालय ने इसकी फाइल पीएमओ भेजी और वहां से यह मामला अटक गया। अब केंद्र ने आईएल को चलाने की गेंद राज्य सरकार के पाले में डाल दी है, लेकिन जयपुर में अभी तक इसे लेकर कोई बैठक तक नहीं हो पाई है।

फिलहाल कोई निर्णय नहीं कर पा रहे : उद्योग मंत्री

Q. कोटा आईएल को लेकर राज्य सरकार क्या कर रही है?
a. इसे लेकर बात चल रही है, इसमें दिक्कत यह है कि सारी इक्विटी केंद्र सरकार की है।
Q. केंद्र सरकार तो आपको काफी पहले ही कह चुकी कि अाप चलाओ, फिर कहां दिक्कत है?
a. हां, यह सही है। लेकिन फिलहाल इसे लेकर कोई फैसला नहीं कर पा रहे। निर्णय करेंगे, तब आपको बताएंगे।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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