दशहरा मैदान में पशु मेला स्थल से लेकर रामद्वारे तक पूरे मैदान वर्षों से हो रहे अतिक्रमण को साढ़े 12 घंटे की मशक्कत के बाद बुधवार को साफ कर दिया। हालांकि कार्रवाई के समय को लेकर सवाल बड़े खड़े हो गए।
सुबह 6 बजे कड़ाके की सर्दी में जब पूरा शहर रजाई में दुबका हुआ था, तब निगम के दस्ते ने पुलिस के बड़े जाब्ते के साथ टापरियां तोड़कर छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को खुले आसमान के नीचे लाकर छोड़ दिया। गरीब बच्चों के पास न तो गर्म कपड़े थे और सर्दी से बचने का कोई उपाय।
निगम प्रशासन ने प्रभावितों को सर्दी से बचाने के लिए रैन बसेरे या कोई और इंतजाम भी नहीं किया। अतिक्रमण हटाने के बाद निगम ने पूरे मैदान की ड्रोन से वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी करवाई। कार्रवाई के दौरान निगम की टीम को विरोध भी झेलना पड़ा।
दशहरा मैदान को प्रगति मैदान बनाने के लिए चारदीवारी हो रही है। जिससे अंबेडकर भवन से किशोरपुरा थाने तक रेत के स्टॉक, पुराने खिड़की-दरवाजे व जालियां बेचने वाले, पशु पालक, ढाबे, गुमटियां व कई झोंपड़ियां आदि अतिक्रमण बाधक थे। पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाए गए, लेकिन अतिक्रमी बार-बार बाउंड्री तोड़कर फिर से बस जाते थे। पिछली कार्रवाइयों में कभी निगम ने रेत के स्टॉक छोड़ दिए तो कभी बाड़े छोड़ दिए।
इस बार निगम उपायुक्त राजेश डागा व फायर आॅफिसर राकेश व्यास सुबह 6 बजे भारी लवाजमा व पुलिस फोर्स लेकर पहुंचे। एक दिन पहले वहां अतिक्रमण हटाने की मुनादी करवा दी थी। उसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटे तो निगम के दस्ते ने इन्हें हटाने कार्रवाई शुरू कर दी। जिससे वहां हड़कंप मच गया। लोग सामान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने मोहलत मांगी तो कुछ विरोध करने लगे। इस पर लोगों को चंद घंटों की मोहलत दी गई। शाम 6.30 बजे तक चले अभियान के बाद मैदान पूरी तरह साफ हो गया।
अतिक्रमी नहीं माने तो पशु व सामान जब्त किए
इस दौरान जिसने सामान नहीं हटाया उनका सामान निगम ने जब्त कर लिया। जिन्होंने सामान हटा लिया उन्हें सामान भरकर कहीं और ले जाने दिया गया। कुछ पशुपालक नहीं माने तो उनके पशुओं को भी जब्त कर कयान हाउस ले जाया गया।
अधिकारियों ने देखा मौका
शाम को निगम आयुक्त शिवप्रसाद एन नकाते व उपायुक्त मुख्यालय राजेंद्र सिंह चारण ने वहां का मौका मुआयना किया। मैदान को पूरी तरह साफ सभी ने पहली बार देखा था। अतिक्रमण के दौरान मैदान की लंबाई-चौड़ाई का पता ही नहीं चल पाता था।
सुबह 6 बजे कड़ाके की सर्दी में जब पूरा शहर रजाई में दुबका हुआ था, तब निगम के दस्ते ने पुलिस के बड़े जाब्ते के साथ टापरियां तोड़कर छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को खुले आसमान के नीचे लाकर छोड़ दिया। गरीब बच्चों के पास न तो गर्म कपड़े थे और सर्दी से बचने का कोई उपाय।
निगम प्रशासन ने प्रभावितों को सर्दी से बचाने के लिए रैन बसेरे या कोई और इंतजाम भी नहीं किया। अतिक्रमण हटाने के बाद निगम ने पूरे मैदान की ड्रोन से वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी करवाई। कार्रवाई के दौरान निगम की टीम को विरोध भी झेलना पड़ा।
दशहरा मैदान को प्रगति मैदान बनाने के लिए चारदीवारी हो रही है। जिससे अंबेडकर भवन से किशोरपुरा थाने तक रेत के स्टॉक, पुराने खिड़की-दरवाजे व जालियां बेचने वाले, पशु पालक, ढाबे, गुमटियां व कई झोंपड़ियां आदि अतिक्रमण बाधक थे। पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाए गए, लेकिन अतिक्रमी बार-बार बाउंड्री तोड़कर फिर से बस जाते थे। पिछली कार्रवाइयों में कभी निगम ने रेत के स्टॉक छोड़ दिए तो कभी बाड़े छोड़ दिए।
इस बार निगम उपायुक्त राजेश डागा व फायर आॅफिसर राकेश व्यास सुबह 6 बजे भारी लवाजमा व पुलिस फोर्स लेकर पहुंचे। एक दिन पहले वहां अतिक्रमण हटाने की मुनादी करवा दी थी। उसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटे तो निगम के दस्ते ने इन्हें हटाने कार्रवाई शुरू कर दी। जिससे वहां हड़कंप मच गया। लोग सामान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने मोहलत मांगी तो कुछ विरोध करने लगे। इस पर लोगों को चंद घंटों की मोहलत दी गई। शाम 6.30 बजे तक चले अभियान के बाद मैदान पूरी तरह साफ हो गया।
अतिक्रमी नहीं माने तो पशु व सामान जब्त किए
इस दौरान जिसने सामान नहीं हटाया उनका सामान निगम ने जब्त कर लिया। जिन्होंने सामान हटा लिया उन्हें सामान भरकर कहीं और ले जाने दिया गया। कुछ पशुपालक नहीं माने तो उनके पशुओं को भी जब्त कर कयान हाउस ले जाया गया।
अधिकारियों ने देखा मौका
शाम को निगम आयुक्त शिवप्रसाद एन नकाते व उपायुक्त मुख्यालय राजेंद्र सिंह चारण ने वहां का मौका मुआयना किया। मैदान को पूरी तरह साफ सभी ने पहली बार देखा था। अतिक्रमण के दौरान मैदान की लंबाई-चौड़ाई का पता ही नहीं चल पाता था।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai