जेकेलोन अस्पताल में सीलन की समस्या दूर किए बगैर पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी पुताई का काम करा रहे हैं। इससे कुछ ही दिनों में दीवार की सूरत वैसी हो जाती है, जैसी पहले थी। खुद स्टाफ यह सवाल कर रहा है कि इस रिनोवेशन का औचित्य क्या है। लेकिन, अस्पताल प्रशासन व पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों को यह कतई नहीं दिखता।
गत दिनों चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ के निरीक्षण के बाद अच्छा-खासा बजट भी मिला है, लेकिन उससे हो रहे काम की स्थिति दयनीय है। अस्पताल के रिनोवेशन के लिए 40 लाख रुपए मिल चुके हैं और 79 लाख और मंजूर हुए हैं, इसमें से 10-12 लाख रुपए का काम भी हो चुका। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी दावा करते हैं कि वे पूरे नाले साफ कर चुके, लेकिन इसके बावजूद सीलन की समस्या तस की तस बनी हुई है।
इंजीनियर आकर देखते नहीं, ठेकेदार कर रहा लीपापोती : अधीक्षक
जेकेलोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरके गुलाटी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग काम ठीक से नहीं कर रहा है। पहले सीलन की समस्या दूर करनी चाहिए थी, फिर पुताई करानी थी। इनके इंजीनियर तो यहां आकर देखते नहीं, ठेकेदार अपने स्तर पर लीपापोती कर रहा है। मैं इसे लेकर डिवीजनल कमिश्नर को भी लिख रहा हूं। इनके काम की क्वालिटी चैक करने का अधिकार हमें नहीं है।
मजबूरी यह है कि हम पीडब्ल्यूडी से ही काम करा सकते हैं। मैंने सालभर पहले लोकल बजट से एक बाहर के ठेकेदार से बाहरी हिस्से की पुताई कराई थी। उसने इनसे सस्ता काम किया और आज तक वह दीवार चमकती है। मेरे नीचे वाले कमरे में ही ये सीलन दूर नहीं कर पाए। पहले कहते थे बरसात से दिक्कत हैं, फिर कहा कि पाइप लीक है। जबकि अब न तो बारिश का सीजन है और न ही पाइप लीक है, लेकिन, सीलन आ रही है।
मैं तो कल ही गया, बताकर थोड़े ही जाएंगे : एक्सईएन
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संजीव गुप्ता ने बताया कि हमने एक बार पूरे नाले साफ कराकर ही काम शुरू कराया है। लेकिन, अस्पताल में महिलाएं नालों में कपड़े डाल जाती है, जिसकी अस्पताल प्रशासन ठीक से सफाई नहीं कराता। नाले जाम होते ही सीलन आ जाती है। मैं तो कल ही वहां जाकर आया हूं, उन्हें बताकर थोड़े ही जाऊंगा। सारे लीकेज हमने ठीक करने का प्रयास किया है। फिर भी यदि कोई समस्या है तो ठेकेदार दोबारा काम करेगा। मैंने एक-एक कमरे की काम कराने के बाद की फोटोग्राफी भी कराई है। अब बाद में ये बिगाड़ दें तो इसका हम क्या कर सकते हैं। फिर भी जिन वार्डों में दिक्कत हैं, उसे ठीक कराऊंगा।
भास्कर ने देखी हकीकत
गायनी-सी वार्ड : इस वार्ड में दो-तीन दिन से रंग-रोगन शुरू कराया गया है। एक दीवार पर पुताई हो चुकी है। रंग सूखा नहीं, उससे पहले ही सीलन दिखने लगी है। लेकिन, ठेकेदार या अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं, पुताई का काम बदस्तूर जारी है।
गायनी ओपीडी: यहां ओपीडी व एएनसी जांच कक्ष के बाहर की गैलरी की छत से ऐसे पानी टपक रहा है, जैसे बारिश के दिन हों। छत व गैलरी का भी रंग-रोगन कराया गया है। पानी इतना टपक रहा है कि बार-बार पोछे लगाकर काम चलाना पड़ रहा है। यहां महिलाओं के फिसलने का भी डर रहता है।
गत दिनों चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ के निरीक्षण के बाद अच्छा-खासा बजट भी मिला है, लेकिन उससे हो रहे काम की स्थिति दयनीय है। अस्पताल के रिनोवेशन के लिए 40 लाख रुपए मिल चुके हैं और 79 लाख और मंजूर हुए हैं, इसमें से 10-12 लाख रुपए का काम भी हो चुका। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी दावा करते हैं कि वे पूरे नाले साफ कर चुके, लेकिन इसके बावजूद सीलन की समस्या तस की तस बनी हुई है।
इंजीनियर आकर देखते नहीं, ठेकेदार कर रहा लीपापोती : अधीक्षक
जेकेलोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरके गुलाटी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग काम ठीक से नहीं कर रहा है। पहले सीलन की समस्या दूर करनी चाहिए थी, फिर पुताई करानी थी। इनके इंजीनियर तो यहां आकर देखते नहीं, ठेकेदार अपने स्तर पर लीपापोती कर रहा है। मैं इसे लेकर डिवीजनल कमिश्नर को भी लिख रहा हूं। इनके काम की क्वालिटी चैक करने का अधिकार हमें नहीं है।
मजबूरी यह है कि हम पीडब्ल्यूडी से ही काम करा सकते हैं। मैंने सालभर पहले लोकल बजट से एक बाहर के ठेकेदार से बाहरी हिस्से की पुताई कराई थी। उसने इनसे सस्ता काम किया और आज तक वह दीवार चमकती है। मेरे नीचे वाले कमरे में ही ये सीलन दूर नहीं कर पाए। पहले कहते थे बरसात से दिक्कत हैं, फिर कहा कि पाइप लीक है। जबकि अब न तो बारिश का सीजन है और न ही पाइप लीक है, लेकिन, सीलन आ रही है।
मैं तो कल ही गया, बताकर थोड़े ही जाएंगे : एक्सईएन
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संजीव गुप्ता ने बताया कि हमने एक बार पूरे नाले साफ कराकर ही काम शुरू कराया है। लेकिन, अस्पताल में महिलाएं नालों में कपड़े डाल जाती है, जिसकी अस्पताल प्रशासन ठीक से सफाई नहीं कराता। नाले जाम होते ही सीलन आ जाती है। मैं तो कल ही वहां जाकर आया हूं, उन्हें बताकर थोड़े ही जाऊंगा। सारे लीकेज हमने ठीक करने का प्रयास किया है। फिर भी यदि कोई समस्या है तो ठेकेदार दोबारा काम करेगा। मैंने एक-एक कमरे की काम कराने के बाद की फोटोग्राफी भी कराई है। अब बाद में ये बिगाड़ दें तो इसका हम क्या कर सकते हैं। फिर भी जिन वार्डों में दिक्कत हैं, उसे ठीक कराऊंगा।
भास्कर ने देखी हकीकत
गायनी-सी वार्ड : इस वार्ड में दो-तीन दिन से रंग-रोगन शुरू कराया गया है। एक दीवार पर पुताई हो चुकी है। रंग सूखा नहीं, उससे पहले ही सीलन दिखने लगी है। लेकिन, ठेकेदार या अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं, पुताई का काम बदस्तूर जारी है।
गायनी ओपीडी: यहां ओपीडी व एएनसी जांच कक्ष के बाहर की गैलरी की छत से ऐसे पानी टपक रहा है, जैसे बारिश के दिन हों। छत व गैलरी का भी रंग-रोगन कराया गया है। पानी इतना टपक रहा है कि बार-बार पोछे लगाकर काम चलाना पड़ रहा है। यहां महिलाओं के फिसलने का भी डर रहता है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai