टाइगर रिजर्व बनने के करीब साढ़े 3 साल बाद मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के पहले 2 गांवों के रिलोकेट किया जाएगा। इसके लिए बजट मिल गया है। अगले 3 महीने में इन गांवों को रिलोकेट कर दिया जाएगा। लक्ष्मीपुरा और खरली बावड़ी नाम के ये दोनों गांव टाइगर रिजर्व क्षेत्र के वे गांव हैं, जिनमें सबसे कम आबादी है।
इसी वजह से वन विभाग ने पहले फेज में इन दोनों गांवों के रिलोकेशन के प्रस्ताव बनाकर भेजे थे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी से हरी झंडी मिलने के बाद पीसीसीएफ कार्यालय ने स्टेट केंपा फंड से 1.35 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए। हालांकि अभी भी टाइगर रिजर्व से 12 गांवों का रिलोकेशन होना है। इस लिहाज से अभी भी रिजर्व में टाइगर आने में कम से कम 2 साल लगेंगे। सरकार ने 9 अप्रैल, 2013 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की अधिसूचना जारी की थी। तब से इसके गांवों के रिलोकेशन के प्रयास चल रहे थे।
बजट मिलते ही सक्रिय हुए कलेक्टर: दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राज्य सरकार ने दोनों गांवों के रिलोकेशन का बजट मंजूर किया है। पत्र मिलते ही कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने 4 जनवरी को वन व राजस्व अधिकारियों की बैठक बुलाई और तय हुआ कि हर हाल में मार्च के पहले जमीन अधिग्रहित कर ली जाए और ग्रामीणों को तय पैकेज की राशि दे दी जाए। इसके बाद 6 व 7 जनवरी को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की टीम भी इन गांवों की विजिट कर चुकी है।
देर से ही सही, शुरुआत तो हुई
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुल 14 गांव हैं, जो रिलोकेट किए जाने हैं। अभी गिरधरपुरा, कोलीपुरा, रूपपुरा, अखावा, दामोदरपुरा, मुकुंदरा (दरा), घाटी, नारायणपुरा, मशालपुरा, अांबा, नौसेरा व भगचाच गांव रिलोकेट होने हैं। इन दोनों गांवों के रिलोकेट होने के बाद अब कलेक्टर ने टाइगर रिजर्व के सबसे बड़े गांव गिरधरपुरा का प्रोजेक्ट बनाने को कहा है।
दोनों गांवों में 4 परिवार
- 4 परिवार रहते हैं, लेकिन जमीन कई गांवों की है।
- लक्ष्मीपुरा में 9.72 हैक्टेयर तथा खरली बावड़ी में 5.86 हैक्टेयर जमीन खाते की है।
- 54 परिवार इन गांवों से जुड़े हैं। इनमें से 4 परिवार यहीं रहते हैं।
- शेष 50 परिवार रहते बाहर हैं, लेकिन उनकी जमीन है।
एक्सपर्ट व्यू वीके सालवान रिटायर्ड आईएफएस
दोनों गांवों के हटने से तैयार होगा बाघ के लिए प्रे-बेस
यह खुशी की बात है दो गांवों के रिलोकेशन के लिए पैसा मिल गया। इसके शुरुआती प्रपोजल में हमने 3 ही गांव लिए थे-खरली बावड़ी, लक्ष्मीपुरा व रूपपुरा। इनमें आबादी कम है और आसानी से रिलोकेट किए जा सकते थे, इसलिए ऐसा किया था। बड़े गांवों को रिलोकेट करना अब आसान काम नहीं रहा। शुरुआत के साथ ही राजनीति शुरू हो जाती है। हालांकि इन दोनों गांवों के रिलोकेशन से घने जंगल का बड़ा क्षेत्र चराई-कटाई रहित हो जाएगा, जो टाइगर का प्रे-बेस बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
प्रे-बेस बढ़ने के बाद टाइगर शिफ्ट करने में कोई दिक्कत नहीं। लेकिन इससे पहले बाघ छोड़ना उपयुक्त नहीं, क्योंकि ऐसी स्थितियों में बाघ के बाहर निकलने की आशंका रहती है। मैं मानता हूं कि अब मुकुंदरा का टाइगर कंजर्वेशन प्लान भी मंजूर होगा, जिससे डेवलपमेंट के लिए पर्याप्त बजट मिलेगा और आगामी एक-दो साल में हमारे जंगल बाघ के रहने लायक स्थिति में आ जाएंगे।
मार्च से पहले रिलोकेट करने का प्रयास
मुकुंदरा हिल्स के डीसीएफ एसआर यादव ने बताया कि केंपा फंड के तहत बजट मिल गया है। हमारा प्रयास है कि मार्च से पहले दोनों गांवों को रिलोकेट कर दें। अब टाइगर शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी एनटीसीए व चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के निर्देशानुसार होगी।
टाइगर रिजर्व अब रिलोकेशन में दिक्कत नहीं
लाडपुरा तहसीलदार गजेंद्र सिंह ने बताया कि बजट मिलने के बाद कलेक्टर इसे लेकर बैठक कर चुके हैं। इसके बाद वन विभाग परीक्षा में व्यस्त हो गया था, अब फिर से इस पर काम शुरू कर देंगे। इसमें सारी एक्सरसाइज हो चुकी है, इसलिए रिलोकेशन में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी।
अब आगे क्या?
ग्रामीण अपनी जमीन राजस्व विभाग को सरेंडर करेंगे। उन्हें डीएलसी दर से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं रह रहे परिवारों को प्रति परिवार 10 लाख रुपए का कैश पैकेज भी दिया जाएगा। जमीन राजस्व विभाग के पास आने के बाद विभाग कलेक्टर को रिपोर्ट देगा। कलेक्टर के आदेश के बाद जमीन वन विभाग के नाम खाते में दर्ज कर दी जाएगी।
इसी वजह से वन विभाग ने पहले फेज में इन दोनों गांवों के रिलोकेशन के प्रस्ताव बनाकर भेजे थे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी से हरी झंडी मिलने के बाद पीसीसीएफ कार्यालय ने स्टेट केंपा फंड से 1.35 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए। हालांकि अभी भी टाइगर रिजर्व से 12 गांवों का रिलोकेशन होना है। इस लिहाज से अभी भी रिजर्व में टाइगर आने में कम से कम 2 साल लगेंगे। सरकार ने 9 अप्रैल, 2013 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की अधिसूचना जारी की थी। तब से इसके गांवों के रिलोकेशन के प्रयास चल रहे थे।
बजट मिलते ही सक्रिय हुए कलेक्टर: दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राज्य सरकार ने दोनों गांवों के रिलोकेशन का बजट मंजूर किया है। पत्र मिलते ही कलेक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने 4 जनवरी को वन व राजस्व अधिकारियों की बैठक बुलाई और तय हुआ कि हर हाल में मार्च के पहले जमीन अधिग्रहित कर ली जाए और ग्रामीणों को तय पैकेज की राशि दे दी जाए। इसके बाद 6 व 7 जनवरी को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की टीम भी इन गांवों की विजिट कर चुकी है।
देर से ही सही, शुरुआत तो हुई
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुल 14 गांव हैं, जो रिलोकेट किए जाने हैं। अभी गिरधरपुरा, कोलीपुरा, रूपपुरा, अखावा, दामोदरपुरा, मुकुंदरा (दरा), घाटी, नारायणपुरा, मशालपुरा, अांबा, नौसेरा व भगचाच गांव रिलोकेट होने हैं। इन दोनों गांवों के रिलोकेट होने के बाद अब कलेक्टर ने टाइगर रिजर्व के सबसे बड़े गांव गिरधरपुरा का प्रोजेक्ट बनाने को कहा है।
दोनों गांवों में 4 परिवार
- 4 परिवार रहते हैं, लेकिन जमीन कई गांवों की है।
- लक्ष्मीपुरा में 9.72 हैक्टेयर तथा खरली बावड़ी में 5.86 हैक्टेयर जमीन खाते की है।
- 54 परिवार इन गांवों से जुड़े हैं। इनमें से 4 परिवार यहीं रहते हैं।
- शेष 50 परिवार रहते बाहर हैं, लेकिन उनकी जमीन है।
एक्सपर्ट व्यू वीके सालवान रिटायर्ड आईएफएस
दोनों गांवों के हटने से तैयार होगा बाघ के लिए प्रे-बेस
यह खुशी की बात है दो गांवों के रिलोकेशन के लिए पैसा मिल गया। इसके शुरुआती प्रपोजल में हमने 3 ही गांव लिए थे-खरली बावड़ी, लक्ष्मीपुरा व रूपपुरा। इनमें आबादी कम है और आसानी से रिलोकेट किए जा सकते थे, इसलिए ऐसा किया था। बड़े गांवों को रिलोकेट करना अब आसान काम नहीं रहा। शुरुआत के साथ ही राजनीति शुरू हो जाती है। हालांकि इन दोनों गांवों के रिलोकेशन से घने जंगल का बड़ा क्षेत्र चराई-कटाई रहित हो जाएगा, जो टाइगर का प्रे-बेस बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
प्रे-बेस बढ़ने के बाद टाइगर शिफ्ट करने में कोई दिक्कत नहीं। लेकिन इससे पहले बाघ छोड़ना उपयुक्त नहीं, क्योंकि ऐसी स्थितियों में बाघ के बाहर निकलने की आशंका रहती है। मैं मानता हूं कि अब मुकुंदरा का टाइगर कंजर्वेशन प्लान भी मंजूर होगा, जिससे डेवलपमेंट के लिए पर्याप्त बजट मिलेगा और आगामी एक-दो साल में हमारे जंगल बाघ के रहने लायक स्थिति में आ जाएंगे।
मार्च से पहले रिलोकेट करने का प्रयास
मुकुंदरा हिल्स के डीसीएफ एसआर यादव ने बताया कि केंपा फंड के तहत बजट मिल गया है। हमारा प्रयास है कि मार्च से पहले दोनों गांवों को रिलोकेट कर दें। अब टाइगर शिफ्टिंग की प्रक्रिया भी एनटीसीए व चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के निर्देशानुसार होगी।
टाइगर रिजर्व अब रिलोकेशन में दिक्कत नहीं
लाडपुरा तहसीलदार गजेंद्र सिंह ने बताया कि बजट मिलने के बाद कलेक्टर इसे लेकर बैठक कर चुके हैं। इसके बाद वन विभाग परीक्षा में व्यस्त हो गया था, अब फिर से इस पर काम शुरू कर देंगे। इसमें सारी एक्सरसाइज हो चुकी है, इसलिए रिलोकेशन में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी।
अब आगे क्या?
ग्रामीण अपनी जमीन राजस्व विभाग को सरेंडर करेंगे। उन्हें डीएलसी दर से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं रह रहे परिवारों को प्रति परिवार 10 लाख रुपए का कैश पैकेज भी दिया जाएगा। जमीन राजस्व विभाग के पास आने के बाद विभाग कलेक्टर को रिपोर्ट देगा। कलेक्टर के आदेश के बाद जमीन वन विभाग के नाम खाते में दर्ज कर दी जाएगी।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai