जिस जिले में सबसे कम एक्सीडेंट उसे एक करोड़ इनाम

जिस जिले में सबसे कम एक्सीडेंट उसे एक करोड़ इनाम

जिस जिले में सबसे कम एक्सीडेंट उसे एक करोड़ इनाम

 जिस जिले में एक्सीडेंट और उनसे होने वाली मृत्यु की दर सबसे कम होगी, उस जिले को सरकार एक करोड़ रुपए का इनाम देगी। इनाम की राशि खर्च करने का अधिकार भी जिले को मिलेगा। शहर के ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए यह प्रावधान बहुप्रतीक्षित रोड सेफ्टी पॉलिसी में किया गया है। जो एक माह के भीतर लागू होने जा रही है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी सीनियर सेक्रेटरी की कमेटी ने कुछ सुझावों के साथ इस पॉलिसी को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। जल्द ही इसे मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बनी इस पॉलिसी में स्टेट हाइवे और एमडीआर (मुख्य जिला मार्ग) पर ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी अहम प्रावधान किए गए हैं। राज्य सरकार पर ट्रैफिक के नए प्लान का वित्तीय भार न पड़े, इसके लिए इसे बीओटी पर चलाने के भी बिंदु भी पॉलिसी में शामिल किए गए हैं। पिछले साल ट्रैफिक के नियम तोड़ने वालों पर चालान से 25 करोड़ रुपए मिले थे। गृह विभाग का मानना है कि ट्रैफिक का नया प्लान बीओटी पर संचालित होगा तो चालान में मिलने वाला पैसा दो से तीन गुना बढ़ेगा, ऐसी सूरत में ट्रैफिक सिस्टम को डिजाइन करने वाली एजेंसी को कुछ प्रतिशत राशि (5 से 10 करोड़ रुपए) दी जा सकेगी। लिहाजा राज्य सरकार जल्द ही नई पॉलिसी को लागू करेगी, क्योंकि उस पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
फैक्ट फाइल
97 लाख वाहनों का वर्तमान में है पंजीयन
7-8 हजार वाहन हर माह होते हैं रजिस्टर्ड
53 हजार एक्सीडेंट होते हैं हर साल
5000 लोगों की मौत हर साल होती है
31 हजार लोग होते हैं घायल
ये पांच बिंदु बनाएंगे ट्रैफिक को बेहतर
<स्टेट हाइवे और एमडीआर का ऑडिट होगा। इसमें पुलिस और वर्क्स डिपार्टमेंट के इंजीनियरों के साथ आईआईटी, मैनिट जैसे संस्थानों को शामिल किया जाएगा। इनकी अनुशंसाओं का पालन अनिवार्य होगा।
<हर सड़क पर 50-50 किमी पर ट्रॉमा की सर्विसेज, क्रैश रेस्क्यू व्हीकल (यदि भीषण एक्सीडेंट में वाहनों को काटकर लोगों को निकालना पड़े तो निकाला जा सके) और एंबुलेंस की सुविधा होगी।
<नई सड़क के निर्माण से पहले बनने वाली डीपीआर में ट्रैफिक पॉलिसी के हिसाब से प्रावधान करने की शर्तें होंगी। इसमें अत्याधुनिक दिशा संकेतक, हाई फ्रीक्वेंसी वाले सीसीटीवी कैमरा, स्पीड मेजरिंग डिवाइसेस, फुटेज रिकॉर्डिंग फेसिलिटी आदि होगी।
<स्टेट लेवल ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर बनेगा, जिसमें सभी विभागों का डाटा रखा जाएगा। किस रोड पर एक्सीडेंट ज्यादा हो रहे हैं या क्राइम हो रहे हैं या लगातार एक ही तरह से दुर्घटनाएं हो रही हैं तो इसकी जानकारी सेंटर में रहेगी।
<सिग्नल को मॉडिफाई किया जाएगा। ताकि वह खुद सेंस करके टाइम तय करे कि लालबत्ती कितनी जल्दी हरी होगी। फिक्स टाइमर की झंझट न रहे।
मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा
कुछ सुझावों के साथ सीनियर सैक्रेटरी की कमेटी ने सहमति दी है। सभी सुझावों को शामिल कर इसे मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। उम्मीद है कि जल्द से जल्द यह लागू होगा।
डीपी गुप्ता, सचिव, गृह विभाग

Related posts

Comments Overview

2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked

Refresh