बिजली के दाम एक बार फिर बढ़ने वाले हैं। विद्युत कंपनियों की मांग पर विद्युत नियामक आयोग आम जनता से आपत्तियां मांग रहा है। इसके बाद आरईआरसी में खुले मंच पर दलील सुनी जाएंगी। लेकिन, इन सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि दाम बढ़ाए क्यों जा रहे हैं? कंपनियों की दलील है कि घाटा हो रहा है।
भास्कर ने इस घाटे का कारण जानने के लिए डिस्कॉम से आंकड़े जुटाए तो ये चौंकाने वाले थे। बड़ा घाटा तो बिजली छीजत से हो रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण है बिजली चोरी। केवल कोटा जिले में ही हर रोज करीब 96 लाख रुपए की बिजली चोरी हो जाती है। जिसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ता है उस आम उपभोक्ता को, जो समय पर अपना बिल चुका रहा है।
जिले के उपभोक्ताओं पर 151 करोड़ रुपए बकाया
चीफ इंजीनियर ऑफिस से नवंबर तक के बिजली बिलों के बकाएदारों के आंकड़े मिले। जिले में 95,168 उपभोक्ताओं पर 151 करोड़ 79 लाख रुपए बकाया हैं। जिले को शहर व ग्रामीण भाग में बांटने पर शहरी 45,728 उपभोक्ताओं पर 74 करोड़ 59 लाख रुपए और ग्रामीण 49,440 उपभोक्ताओं पर 77 करोड़ 20 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं। चीफ इंजीनियर बीएल पचेरवाल का कहना है कि बकाया राशि वसूलने के लिए हर सब डिवीजन में निगम की टीमें लगी हुई हैं।
रोज 64 लाख यूनिट बिजली की छीजत
एसई टीएन सामरिया के अनुसार कोटा जिले में प्रतिदिन 64 लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। उसमें से 30 फीसदी बिजली छीजत हो रही है। ऐसे में 19 लाख 20 हजार यूनिट प्रतिदिन बिजली की चोरी होने से व्यर्थ में खर्च हो रही है। जबकि औसत बिजली 5 रुपए प्रति यूनिट पड़ रही है। इस प्रकार बिजली चोरी का गणित लगाने पर हर दिन 96 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है।
पूरे संभाग में 440 करोड़ रुपए बकाया
जबकि कोटा जिला समेत कोटा संभाग में 2 लाख 52 हजार 844 उपभोक्ताओं पर 440 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं। बारां 165 करोड़ 08 हजार, कोटा 151 करोड़ 79 लाख, झालावाड़ 95 करोड़ 49 लाख व सबसे कम 28 करोड़ 28 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं।
बिजली चोरी के लिए संवेदनशील क्षेत्र
शहर में बिजली चोरी के लिए घंटाघर, अनंतपुरा, प्रेमनगर, रेलवे स्टेशन के आसपास बसी बस्तियां, संतोषीनगर, नदी पार बालिता बस्ती, करणीनगर, कोटड़ी व छावनी का अंदरूनी इलाका, राजीव गांधी कच्ची बस्ती समेत कई कच्ची बस्तियां संवेदनशील हैं।
भास्कर ने इस घाटे का कारण जानने के लिए डिस्कॉम से आंकड़े जुटाए तो ये चौंकाने वाले थे। बड़ा घाटा तो बिजली छीजत से हो रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण है बिजली चोरी। केवल कोटा जिले में ही हर रोज करीब 96 लाख रुपए की बिजली चोरी हो जाती है। जिसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ता है उस आम उपभोक्ता को, जो समय पर अपना बिल चुका रहा है।
जिले के उपभोक्ताओं पर 151 करोड़ रुपए बकाया
चीफ इंजीनियर ऑफिस से नवंबर तक के बिजली बिलों के बकाएदारों के आंकड़े मिले। जिले में 95,168 उपभोक्ताओं पर 151 करोड़ 79 लाख रुपए बकाया हैं। जिले को शहर व ग्रामीण भाग में बांटने पर शहरी 45,728 उपभोक्ताओं पर 74 करोड़ 59 लाख रुपए और ग्रामीण 49,440 उपभोक्ताओं पर 77 करोड़ 20 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं। चीफ इंजीनियर बीएल पचेरवाल का कहना है कि बकाया राशि वसूलने के लिए हर सब डिवीजन में निगम की टीमें लगी हुई हैं।
रोज 64 लाख यूनिट बिजली की छीजत
एसई टीएन सामरिया के अनुसार कोटा जिले में प्रतिदिन 64 लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। उसमें से 30 फीसदी बिजली छीजत हो रही है। ऐसे में 19 लाख 20 हजार यूनिट प्रतिदिन बिजली की चोरी होने से व्यर्थ में खर्च हो रही है। जबकि औसत बिजली 5 रुपए प्रति यूनिट पड़ रही है। इस प्रकार बिजली चोरी का गणित लगाने पर हर दिन 96 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है।
पूरे संभाग में 440 करोड़ रुपए बकाया
जबकि कोटा जिला समेत कोटा संभाग में 2 लाख 52 हजार 844 उपभोक्ताओं पर 440 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं। बारां 165 करोड़ 08 हजार, कोटा 151 करोड़ 79 लाख, झालावाड़ 95 करोड़ 49 लाख व सबसे कम 28 करोड़ 28 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं।
बिजली चोरी के लिए संवेदनशील क्षेत्र
शहर में बिजली चोरी के लिए घंटाघर, अनंतपुरा, प्रेमनगर, रेलवे स्टेशन के आसपास बसी बस्तियां, संतोषीनगर, नदी पार बालिता बस्ती, करणीनगर, कोटड़ी व छावनी का अंदरूनी इलाका, राजीव गांधी कच्ची बस्ती समेत कई कच्ची बस्तियां संवेदनशील हैं।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai