लंबे समय तक जद्दोजहद के बाद कोटा में ब्रेनडेड कमेटी तो बन गई, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अड़ियल रवैये के चलते कमेटी काम नहीं शुरू कर रही। इसके चलते पिछले दिनों कोटा में एक ब्रेनडेड बालक के अंगदान नहीं हो सके। उसके अंगदान से 6 लोगों को जीवनदान मिल सकता था।
लेटर का कर रहे इंतजार
दरअसल प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा ब्रेनडेड कमेटी के लिए मंजूरी के लेटर का इंतजार कर रहे हैं। डॉ. वर्मा का कहना है कि ये लेटर स्वास्थ्य सचिवालय या ऑर्गन डोनेशन प्रोग्राम के अधिकारियों की ओर से आना है। भास्कर ने 8 महीने से अटके इस मुद्दे को लेकर डोनेशन प्रोग्राम के चेयरमैन नीरज के पवन से बात की तो उन्होंने बताया कि कमेटी को काम शुरू करने के लिए किसी इजाजत की जरूरत ही नहीं है। ब्रेनडेड व्यक्ति के अंग निकालने के लिए रिट्राइवल सेंटर की जरूरत होती है जिसके लिए मंजूरी चाहिए होती है। इससे पहले नोडल अधिकारी डॉ. मनीष भी यही बात कह चुके हैं।
ये है भास्कर के सवाल
- ब्रेनडेड कमेटी को लेकर अगर कोई असमंजस है तो उसे 8 माह में दूर क्यों नहीं किया गया?
- संचार के तमाम संसाधन ई-मेल, वीडियो कांफ्रेंसिंग सबकुछ होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज पत्र का इंतजार क्यों कर रहा है?
- कानून को लेकर कोई समस्या है तो अधिकारियों के साथ बैठकर अब उसे दूर क्यों नहीं किया?
इन्होंने क्या कहा
- ऑर्गन डोनेशन प्रोग्राम के चेयरमैन नीरज के पवन ने कहा है कि मेरे समझ में नहीं आ रहा है कि ये कंफ्यूजन क्यों है। मंगलवार को इसका सॉल्यूशन किया जाएगा। ब्रेन डेड कमेटी बनना ही पर्याप्त है। वो ब्रेनडेड घोषित करने की कार्रवाई कर सकती है। रिट्राइवल सेंटर की परमिशन यदि ग्रुप-1 ऑफिस में कहीं अटकी है तो उसे भी रिलीज करवाया जाएगा।
- मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ गिरीश वर्मा ने कहा है कि हमारे पास ब्रेनडेड कमेटी के काम करने के संबंध में कोई आदेश-निर्देश नहीं हैं। पहले वे हमें अधिकृत तो करें फिर हम काम करेंगे। ब्रेनडेड का जो कानून है उसमें कई सारे इश्यू होते हैं। इसलिए बिना स्वीकृति या आदेश के हम कोई काम नहीं कर सकते।
- वहीं, विधायक संदीप शर्मा ने कहा है कि ब्रेनडेड कमेटी को लेकर क्या विरोधाभास हो रहा है, परमिशन चाहिए तो वो कहां अटकी है, इस संबंध में चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ व हेल्थ सेक्रेटरी मुकेश शर्मा से बात करुंगा। इस काम को जल्दी ही शुरू करवाया जाएगा।
लेटर का कर रहे इंतजार
दरअसल प्रिंसिपल डॉ. गिरीश वर्मा ब्रेनडेड कमेटी के लिए मंजूरी के लेटर का इंतजार कर रहे हैं। डॉ. वर्मा का कहना है कि ये लेटर स्वास्थ्य सचिवालय या ऑर्गन डोनेशन प्रोग्राम के अधिकारियों की ओर से आना है। भास्कर ने 8 महीने से अटके इस मुद्दे को लेकर डोनेशन प्रोग्राम के चेयरमैन नीरज के पवन से बात की तो उन्होंने बताया कि कमेटी को काम शुरू करने के लिए किसी इजाजत की जरूरत ही नहीं है। ब्रेनडेड व्यक्ति के अंग निकालने के लिए रिट्राइवल सेंटर की जरूरत होती है जिसके लिए मंजूरी चाहिए होती है। इससे पहले नोडल अधिकारी डॉ. मनीष भी यही बात कह चुके हैं।
ये है भास्कर के सवाल
- ब्रेनडेड कमेटी को लेकर अगर कोई असमंजस है तो उसे 8 माह में दूर क्यों नहीं किया गया?
- संचार के तमाम संसाधन ई-मेल, वीडियो कांफ्रेंसिंग सबकुछ होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज पत्र का इंतजार क्यों कर रहा है?
- कानून को लेकर कोई समस्या है तो अधिकारियों के साथ बैठकर अब उसे दूर क्यों नहीं किया?
इन्होंने क्या कहा
- ऑर्गन डोनेशन प्रोग्राम के चेयरमैन नीरज के पवन ने कहा है कि मेरे समझ में नहीं आ रहा है कि ये कंफ्यूजन क्यों है। मंगलवार को इसका सॉल्यूशन किया जाएगा। ब्रेन डेड कमेटी बनना ही पर्याप्त है। वो ब्रेनडेड घोषित करने की कार्रवाई कर सकती है। रिट्राइवल सेंटर की परमिशन यदि ग्रुप-1 ऑफिस में कहीं अटकी है तो उसे भी रिलीज करवाया जाएगा।
- मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ गिरीश वर्मा ने कहा है कि हमारे पास ब्रेनडेड कमेटी के काम करने के संबंध में कोई आदेश-निर्देश नहीं हैं। पहले वे हमें अधिकृत तो करें फिर हम काम करेंगे। ब्रेनडेड का जो कानून है उसमें कई सारे इश्यू होते हैं। इसलिए बिना स्वीकृति या आदेश के हम कोई काम नहीं कर सकते।
- वहीं, विधायक संदीप शर्मा ने कहा है कि ब्रेनडेड कमेटी को लेकर क्या विरोधाभास हो रहा है, परमिशन चाहिए तो वो कहां अटकी है, इस संबंध में चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ व हेल्थ सेक्रेटरी मुकेश शर्मा से बात करुंगा। इस काम को जल्दी ही शुरू करवाया जाएगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai