शहर में चर्चा जोर-शोर से है कि नगर निगम व यूआईटी को क्या हो गया? अतिक्रमियों व भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। फर्जी काॅलोनियां काटकर भोली-भाली जनता की गाड़ी कमाई को लूटने वाले भागे-भागे फिर रहे हैं। वर्षों के अतिक्रमणों की नीवें हिलने लगी है।
दो चेहरे सामने आए
करोड़ों की बेशकीमती जमीनें नगर निगम के खाते में दर्ज होने लगी हैं। भास्कर ने जब इसके पीछे की हकीकत जानी तो दो चेहरे सामने आए। यूआईटी के सचिव डॉ. एमएल यादव और नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक विंग के प्रभारी फायर आॅफिसर राकेश व्यास। इन दोनों की दृढ़ इच्छा का ही नतीजा है कि आज पीठ पीछे इनकी तारीफ हो रही है। भास्कर ने दोनों ही अधिकारियों से बातचीत की
अब आएंगी योजनाएं: डॉ. यादव यूआईटी सचिव
Q. अचानक यूआईटी के पास इतनी जमीन कैसे और कहां से आ गई?
यादव- लगातार सूचना मिल रही थी कि भूमाफिया सिवायचक जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। इस पर कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर ने इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उसके बाद जमीनों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू कर दी।
Q. अब तक कितनी जमीन मुक्त करवाई?
यादव- पिछले सवा साल में जगपुरा, धाकडख़ेड़ी, रायपुरा, नयानोहरा, कुन्हाड़ी, नांता आदि क्षेत्र में 700 बीघा जमीन मुक्त करवाई गई है।
Q.अब इन जमीनों का यूआईटी क्या करेगा? जनता को कैसे लाभ मिलेगा?
यादव- जमीन नहीं होने के कारण नई आवासीय योजना नहीं ला पा रहे थे। अब इन जमीनों पर निम्न, अल्प व उच्च आय वर्ग के लिए आवासीय, शैक्षणिक, व्यावसायिक, मोटल, नर्सरी व फार्म हाउस योजनाएं ला रहे हैं। जो जनता के लिए ही होगी।
Q. यूआईटी की देनदारियां भी काफी थी, क्या वो चुका दी गई?
यादव- मैं जब आया तब 80 करोड़ रुपए की देनदारी थी। अब कोई देनदारी नहीं है। बल्कि करीब 250 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट यूआईटी के चल रहे हैं।
Q. भूखंड या जमीन खरीदते समय जनता धोखाधड़ी से कैसे बचे?
यादव- जिससे सौदा कर रहे हैं उससे यूआईटी से एप्रूव्ड नक्शा व लेआउट प्लान मांगें। फिर भी शंका हो तो उन नक्शे व कागजात को लेकर यूआईटी में दो तहसीलदार हैं उनसे जांच करवा सकते हैं।
मुझे किसी राजनेता ने कभी नहीं रोका, राकेश व्यास एफओ
Q. अतिक्रमण पर सुस्त रहने वाला निगम अचानक कैसे जागा?
व्यास- दशहरा मेले के दौरान मैदान से अतिक्रमण हटाना था। मैं फायर आॅफिसर था, अतिक्रमण निरोधक प्रभारी कोई नहीं था। आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते व उपायुक्त राजेश डागा ने वहां का अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दी। उस काम को देखते हुए स्मार्ट सिटी बनने में बाधक अन्य अतिक्रमणों को हटाने की जिम्मेदारी मिल गई।
Q. अब तक कितने अतिक्रमण हटाए?
व्यास- जब से मुझे जिम्मेदारी मिली, तब से अब तक निगम की 6 पक्की प्याऊ मुक्त करवाई। जिनमें सालों से दुकान बनाकर कब्जा कर रखा था। उनकी कीमत करोड़ों रुपए है। 25 से अधिक पक्के अतिक्रमण तथा बाजारों को जाम कर रहे दर्जनों छोटे अतिक्रमण हटाए। निगम की 33 दुकानें मुक्त करवाई। कई बेशकीमती भूखंड खाली करवाए। जहां की भी शिकायत मिली उसे तोड़ा गया। कहीं से भी खाली हाथ नहीं लौटे।
Q. प्रचलित है कि निगम की कार्रवाई में राजनैतिक हस्तक्षेप ज्यादा होता है?
व्यास- अभी तक तो किसी भी जनप्रतिनिधि ने अतिक्रमण तोड़ने से रोका नहीं। हां कभी इस तरह के फोन जरूर आते हैं कि सामान हटाने के लिए एक-दो दिन की मोहलत दे दो। मानवीय आधार पर कई बार मोहलत देते भी है।
Q. अतिक्रमियों व भूमाफियाओं पर निगम की ये सख्ती आगे भी जारी रहेगी?
व्यास- बिल्कुल जारी रहेगी। हमने तो आगे एक महीने में कहां-कहां अतिक्रमण हटाने हैं, उस तक की सूची बना रखी है। शीघ्र ही कालातालाब में निगम के कांजी हाउस को कब्जाधारियों से मुक्त करवाना है और विज्ञाननगर में एक बड़े भूखंड को खाली करवाना है।
Q. सबसे ज्यादा मुश्किल कहां आई?
व्यास- महावीर नगर की कार्रवाई में उपमहापौर व अधिकारी भी साथ थे। जनता ने हमें घेर लिया। स्थानीय होने के कारण बातचीत से लोगों से समझाकर अतिक्रमण हटाया। इसके अलावा दशहरे मैदान में लगी अवैध शराब की दुकान हटाने में पसीना आया। उसे 4 बार तोड़ी तब जाकर अब उससे मुक्ति मिली।
दो चेहरे सामने आए
करोड़ों की बेशकीमती जमीनें नगर निगम के खाते में दर्ज होने लगी हैं। भास्कर ने जब इसके पीछे की हकीकत जानी तो दो चेहरे सामने आए। यूआईटी के सचिव डॉ. एमएल यादव और नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक विंग के प्रभारी फायर आॅफिसर राकेश व्यास। इन दोनों की दृढ़ इच्छा का ही नतीजा है कि आज पीठ पीछे इनकी तारीफ हो रही है। भास्कर ने दोनों ही अधिकारियों से बातचीत की
अब आएंगी योजनाएं: डॉ. यादव यूआईटी सचिव
Q. अचानक यूआईटी के पास इतनी जमीन कैसे और कहां से आ गई?
यादव- लगातार सूचना मिल रही थी कि भूमाफिया सिवायचक जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। इस पर कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर ने इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उसके बाद जमीनों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू कर दी।
Q. अब तक कितनी जमीन मुक्त करवाई?
यादव- पिछले सवा साल में जगपुरा, धाकडख़ेड़ी, रायपुरा, नयानोहरा, कुन्हाड़ी, नांता आदि क्षेत्र में 700 बीघा जमीन मुक्त करवाई गई है।
Q.अब इन जमीनों का यूआईटी क्या करेगा? जनता को कैसे लाभ मिलेगा?
यादव- जमीन नहीं होने के कारण नई आवासीय योजना नहीं ला पा रहे थे। अब इन जमीनों पर निम्न, अल्प व उच्च आय वर्ग के लिए आवासीय, शैक्षणिक, व्यावसायिक, मोटल, नर्सरी व फार्म हाउस योजनाएं ला रहे हैं। जो जनता के लिए ही होगी।
Q. यूआईटी की देनदारियां भी काफी थी, क्या वो चुका दी गई?
यादव- मैं जब आया तब 80 करोड़ रुपए की देनदारी थी। अब कोई देनदारी नहीं है। बल्कि करीब 250 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट यूआईटी के चल रहे हैं।
Q. भूखंड या जमीन खरीदते समय जनता धोखाधड़ी से कैसे बचे?
यादव- जिससे सौदा कर रहे हैं उससे यूआईटी से एप्रूव्ड नक्शा व लेआउट प्लान मांगें। फिर भी शंका हो तो उन नक्शे व कागजात को लेकर यूआईटी में दो तहसीलदार हैं उनसे जांच करवा सकते हैं।
मुझे किसी राजनेता ने कभी नहीं रोका, राकेश व्यास एफओ
Q. अतिक्रमण पर सुस्त रहने वाला निगम अचानक कैसे जागा?
व्यास- दशहरा मेले के दौरान मैदान से अतिक्रमण हटाना था। मैं फायर आॅफिसर था, अतिक्रमण निरोधक प्रभारी कोई नहीं था। आयुक्त शिवप्रसाद एम नकाते व उपायुक्त राजेश डागा ने वहां का अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी दी। उस काम को देखते हुए स्मार्ट सिटी बनने में बाधक अन्य अतिक्रमणों को हटाने की जिम्मेदारी मिल गई।
Q. अब तक कितने अतिक्रमण हटाए?
व्यास- जब से मुझे जिम्मेदारी मिली, तब से अब तक निगम की 6 पक्की प्याऊ मुक्त करवाई। जिनमें सालों से दुकान बनाकर कब्जा कर रखा था। उनकी कीमत करोड़ों रुपए है। 25 से अधिक पक्के अतिक्रमण तथा बाजारों को जाम कर रहे दर्जनों छोटे अतिक्रमण हटाए। निगम की 33 दुकानें मुक्त करवाई। कई बेशकीमती भूखंड खाली करवाए। जहां की भी शिकायत मिली उसे तोड़ा गया। कहीं से भी खाली हाथ नहीं लौटे।
Q. प्रचलित है कि निगम की कार्रवाई में राजनैतिक हस्तक्षेप ज्यादा होता है?
व्यास- अभी तक तो किसी भी जनप्रतिनिधि ने अतिक्रमण तोड़ने से रोका नहीं। हां कभी इस तरह के फोन जरूर आते हैं कि सामान हटाने के लिए एक-दो दिन की मोहलत दे दो। मानवीय आधार पर कई बार मोहलत देते भी है।
Q. अतिक्रमियों व भूमाफियाओं पर निगम की ये सख्ती आगे भी जारी रहेगी?
व्यास- बिल्कुल जारी रहेगी। हमने तो आगे एक महीने में कहां-कहां अतिक्रमण हटाने हैं, उस तक की सूची बना रखी है। शीघ्र ही कालातालाब में निगम के कांजी हाउस को कब्जाधारियों से मुक्त करवाना है और विज्ञाननगर में एक बड़े भूखंड को खाली करवाना है।
Q. सबसे ज्यादा मुश्किल कहां आई?
व्यास- महावीर नगर की कार्रवाई में उपमहापौर व अधिकारी भी साथ थे। जनता ने हमें घेर लिया। स्थानीय होने के कारण बातचीत से लोगों से समझाकर अतिक्रमण हटाया। इसके अलावा दशहरे मैदान में लगी अवैध शराब की दुकान हटाने में पसीना आया। उसे 4 बार तोड़ी तब जाकर अब उससे मुक्ति मिली।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai