जिले में 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद इनमें से केवल 3 सीएचसी सही काम कर रहे हैं, बाकी 10 जगह से प्रसव के ऐसे मामलों को रैफर कर दिया जाता है। इन्हीं कारणों से कोटा जिले में पैदा होने वाले एक हजार में से 36 नवजात दुिनया नहीं देख पाते। एकमात्र कैथून सीएचसी है, जहां ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा है। 80 किमी दूर इटावा, 75 किमी दूर रामगंजमंडी और बॉर्डर के 100 किमी से दूर इलाकों से प्रसूताएं कोटा के जेके लोन अस्पताल के भरोसे हैं।
कोटा आने में लग जाते हैं कई घंटे: चेचट, कैथून, इटावा, कनवास, खातौली, मंडाना, मोड़क, रामगंजमंडी, सांगोद, सुकेत, सुल्तानपुर, भीमगंजमंडी व दादाबाड़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में से कैथून, दादाबाड़ी व सांगोद पर ही ऑपरेशन थिएटर के ताले खुलते हैं। इनमें से भी सांगोद में निश्चेतना विशेषज्ञ नहीं होने से बड़े ऑपरेशन नहीं हो पाते। गायनीकोलॉजिस्ट लंबी छुट्टी पर हैं। ऐसे में सीजेरियन बंद हैं। दुर्गम क्षेत्र इटावा से कोटा आने में ही घंटों लगते हैं। इसके बावजूद सीजेरियन जैसी सुविधा नहीं है। ऐसा ही हाल रामगंजमंडी का है, जहां रोगियों को मजबूरन निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।
120 किमी दूर खातौली पगडंडी जैसी सड़क
इटावा व खातौली ऐसा क्षेत्र है, जिसके आसपास के गांव चंबल किनारे के दुर्गम क्षेत्र में आबाद है। जिले का अंतिम छोर वाला गांव है कैथूदा। यह खातौली से भी 22 किलोमीटर है। यानी यहां से कोटा की दूरी 120 किमी पड़ती है। कैथूदा से खातौली तक जाने वाली सड़क ऐसी है कि 22 किमी में ही एक घंटे से ज्यादा लग जाता है। इसके बाद कोटा पहुंचने में डेढ़ से 2 घंटे लगते हैं।
वहां सुविधा होती तो कोटा क्यों लाना पड़ता?
कनवास की मुकलेश का भी सीजेरियन प्रसव हुआ है। कोटा से कनवास की दूरी करीब 50 किमी है। पति बद्रीलाल ने बताया कि कनवास अस्पताल में डिलीवरी से जुड़ी सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए मैंने पहले वाली डिलीवरी भी कोटा में ही कराई थी और इस बार भी कोटा ही लाया। दो दिन पहले दर्द शुरू हुए तो 108 एंबुलेंस से उसे कोटा ले आया, यहां सीजेरियन से डिलीवरी हो गई।
वहां सुविधा नहीं, एक माह पहले ही कोटा आ गए
जेके लोन अस्पताल में खातौली, इटावा की बादाम का सीजेरियन प्रसव हुआ है। सीजेरियन वार्ड में भर्ती बादाम के पति सोभाग ने बताया कि इटावा और खातौली, दोनों ही जगह अस्पतालों में ज्यादा सुविधा नहीं है। डिलीवरी होनी थी, इसलिए मैं एक माह पहले ही उसे कोटा अपने रिश्तेदारों के यहां ले आया। ऐनवक्त पर लाने में दिक्कत होती है। यदि वहां सुविधा होती तो यहां क्यों लाते?
13 सीएचसी में मात्र 3 गायनी सर्जन
लाखों लोग प्रभावित
प्रत्येक सीएचसी के अधीन एक लाख लोगों की आबादी आती है, इस लिहाज से जिले के 10 लाख से ज्यादा लोग ऑपरेशन संबंधी सेवाओं से वंचित हैंं।
10 लाख की ग्रामीण आबादी पर 1 हॉस्पिटल जितने विशेषज्ञ भी नहीं
-9 विशेषज्ञ हैं पूरे जिले में कोटा शहर को छोड़कर
- 3 जनरल सर्जन हैं इनमें
- 3 गायनी सर्जन
- 3 निश्चेतना विशेषज्ञ हैं
क्या होती है सीएचसी, क्या होना चाहिए?
-1 लाख की आबादी पर खुलती है सीएचसी, 30 पलंग का होता है यह अस्पताल।
-यहां सर्जन, गायनीकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन व चिकित्सा अधिकारी होने चाहिए।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai