सूरजपोल स्थित संभाग के एक मात्र राज्य अभिलेखागार कार्यालय स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। स्वीकृत 10 पदों में से यहां एक अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त है। स्टॉफ की कमी से यहां की व्यवस्था गड़बड़ा रही है। जिससे 300 साल से भी अधिक पुराने रियासतकालीन दस्तावेजों और चार हजार ऐतिहासिक बस्तों और साढ़े तीन हजार बहियों का प्रॉपर संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
अभिलेखागार में कोटा शहर समेत हाड़ौती की कला, वैभव संस्कृति का इतिहास पन्नों में सिमटा हुआ है। कार्यालय में स्वीकृत दो कर्मचारियों को बीकानेर निदेशालय में डेपुटेशन में लगाया हुआ है। जिन्हें नहीं लगाया जा रहा है। यहां आने वाले रिसर्चर इतिहास स्टूडेंट्स को निराश लौटना पड़ता है। यहां प्रयोगशाला, परिरक्षण, बंधक सहायक कर्मचारी, चौकीदारों के पद खाली हैं।
प्राचीनता की दृष्टि से प्रदेश के दूसरे नंबर के इस रिकॉर्ड को प्रदेश की यूनिवर्सिटी के अलावा अन्य राज्यों की यूनिवर्सिटी के रिसर्चर और विद्वानों ने इस्तेमाल किया है। यहां के विषयों पर भी पीएचडी भी हासिल की है। रिकार्ड्स की जानकारी विदेशों में भी पहुंची है। उल्लेखनीय है कि इतिहास की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए 1955-56 में इस विभाग की स्थापना की थी।
इतिहासकार डॉ. मथुरालाल शर्मा को इसे विकसित करने का जिम्मा सौंपा था। इन्होंने यहां अवैतनिक सेवाएं दीं।
ट्रांसलेटर का पद भी खाली, नहीं पढ़ सकते दस्तावेज
यहां ट्रांसलेटर (गूढ़ अक्षर वाचक) का पद भी लंबे समय से खाली चल रहा हैं। कार्यालयों और आमजन को रिकॉर्ड पढ़ने और जानकारी देने के लिए यह पद अनिवार्य है। लेकिन, स्थिति यह है कि हाड़ौती, उर्दू और अंग्रेजी भाषा के इन दस्तावेजों को पढ़कर जानकारी देने वाले तक यहां नहीं हैं।
राजस्थान राज्य अभिलेखागार रामेश्वर शर्मा ने बताया कि यहां खाली पदों को लेकर निदेशालय को लिख दिया हैं। वर्तमान में यहां दो जनों का स्टाफ हैं। ट्रांसलेटर का पद खाली होेने से यहां आने वालों को जानकारी देने में असमर्थता महसूस करते हैं। उम्मीद है कि जल्द ही ये पद भरे जाएंगे।
Job
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