प्रशासन व नगर निगम की ओर से पॉलीथिन विक्रेताओं पर लगातार मारे जा रहे छापों के बीच व्यापारियों ने प्रशासन से दो दिन का समय मांगा है। उनका कहना है कि छापों में जब्त हा़े रही पॉलीथिन से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। जो स्टॉक उनके पास है, उसे डिस्पोज करने के लिए उन्हें 2 दिन का समय दे दिया जाए।
वे भी चाहते हैं कि शहर पॉलीथिन मुक्त हो, इसमें पूरा सहयोग देने के लिए भी तैयार हैं। इसको लेकर सोमवार को व्यापारियों ने पार्षद रमेश आहूजा के साथ नगर निगम आयुक्त राजेश डागा से मुलाकात की। मंगलवार को कोटा व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों के साथ व्यापारी कलेक्टर से भी मुलाकात करेंगे।
जो स्टॉक है उसे तो भेजने दो: बैठक में व्यापारी बोले वे पॉलीथिन का व्यापार नहीं करेंगे। अपना व्यवसाय बदल लेंगे। इसके लिए शपथपत्र भरकर देने के लिए तैयार हैं। लेकिन, बाहर से जो पॉलीथिन का स्टॉक उन्होंने मंगवा लिया है, उसे वापस भेजने या डिस्पोज के लिए 2 दिन का समय दे दिया जाए। कोटा को पॉलीथिन मुक्त करवाने के लिए वे पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि जो पॉलीथिन का स्टॉक निगम की टीम ने पकड़ा है, उसे उदारता दिखाते हुए व्यापारियों को वापस लौटा दिया जाए। इससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
पॉलीथिन वापस नहीं मिलेगी
उपायुक्त डागा ने दो टूक शब्दों में व्यापारियों को कह दिया कि जो पॉलीथिन जब्त हो चुकी है, उसे किसी भी स्थिति में वापस नहीं लौटाया जाएगा। इसका विचार करना व मांग करना ही गलत है। जहां तक स्टॉक को बाहर निकालने व वापस फैक्ट्रियों को भेजने की बात है तो इसके लिए समय कलेक्टर ही दे सकते हैं। व्यापारी उनसे मिलकर अपनी बात रखें। निगम कलेक्टर के कहने पर ही अपनी कार्रवाई बंद करेगा।
सभी तरह की पॉलीथिन प्रतिबंधित
व्यापारियों ने तर्क दिया कि 40 माइक्रोन की पॉलीथिन पर प्रतिबंध नहीं है, इसलिए उसे बेचने दिया जाए । इस पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य को बैठक में बुलाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पैकिंग व दूध की थैलियों को ही छूट है, बाकी सभी पॉलीथिन प्रतिबंधित हैं। उपायुक्त डागा ने बताया कि माइक्रोन का बहाना करके कोई बच नहीं सकता। इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र हाड़ा, विनोद नायक आदि भी मौजूद थे।
सोमवार को भी दिनभर चली जांच
इस बीच प्रभारी राकेश व्यास के नेतृत्व में दिन भर शहर में जांच अभियान चला। सुबह यहां पैकिंग करने वाली तीन फैक्ट्रियों की जांच की गई। इसके अलावा रामपुरा क्षेत्र से थैलियां जब्त की गईं।
पार्षदों का दावा- पॉलीथिन बंद होने से कचरा हुआ आधा
भास्कर की पहल पर प्रशासन व नगर निगम की ओर से पॉलीथिन के खिलाफ चल रहे अभियान का असर दिखने लगा है। खुद पार्षदों का ही कहना है कि अभियान के असर से वार्ड में कचरा भी कम होने लगा है। पार्षद देवेंद्र चौधरी मामा ने कहा कि उनके वार्ड में पहले जिस प्रकार से कचरे के ढेर लगे रहते थे, उसमें 50 प्रतिशत तक कमी आ गई है। अब सड़कों पर थैलियां बिखरी नहीं दिखाई देतीं। यही बात पार्षद प्रकाश सैनी ने कही। उन्होंने कहा कि भास्कर ने जो अभियान चलाया है, उसका असर अब शहर में दिखाई देने लगा है। पार्षद रमेश आहूजा ने कहा कि हम तो शुरू से ही पॉलीथिन के खिलाफ रहे हैं। जिस प्रकार से अभियान चला है, उसका असर शुरू हो गया है। कचरा तो घरों से निकल रहा है, लेकिन उसमें अब पॉलीथिन नहीं रहती।
नालियां जाम होने और गंदगी की शिकायतें भी हुईं कम
उपायुक्त राजेश डागा ने कहा कि पॉलीथिन कम होने से शहर पूरी तरह साफ सुथरा नजर आने लगा है। अब शहर में सफाई नहीं होने और नालियां जाम होने जैसी शिकायतें नहीं हो रहीं। कार्यवाहक आयुक्त राजेन्द्र सिंह चारण ने कहा कि अभियान का सबसे अधिक असर शहर की सफाई पर पड़ा है। इसमें काफी सुधार हुआ है।
वे भी चाहते हैं कि शहर पॉलीथिन मुक्त हो, इसमें पूरा सहयोग देने के लिए भी तैयार हैं। इसको लेकर सोमवार को व्यापारियों ने पार्षद रमेश आहूजा के साथ नगर निगम आयुक्त राजेश डागा से मुलाकात की। मंगलवार को कोटा व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों के साथ व्यापारी कलेक्टर से भी मुलाकात करेंगे।
जो स्टॉक है उसे तो भेजने दो: बैठक में व्यापारी बोले वे पॉलीथिन का व्यापार नहीं करेंगे। अपना व्यवसाय बदल लेंगे। इसके लिए शपथपत्र भरकर देने के लिए तैयार हैं। लेकिन, बाहर से जो पॉलीथिन का स्टॉक उन्होंने मंगवा लिया है, उसे वापस भेजने या डिस्पोज के लिए 2 दिन का समय दे दिया जाए। कोटा को पॉलीथिन मुक्त करवाने के लिए वे पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि जो पॉलीथिन का स्टॉक निगम की टीम ने पकड़ा है, उसे उदारता दिखाते हुए व्यापारियों को वापस लौटा दिया जाए। इससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
पॉलीथिन वापस नहीं मिलेगी
उपायुक्त डागा ने दो टूक शब्दों में व्यापारियों को कह दिया कि जो पॉलीथिन जब्त हो चुकी है, उसे किसी भी स्थिति में वापस नहीं लौटाया जाएगा। इसका विचार करना व मांग करना ही गलत है। जहां तक स्टॉक को बाहर निकालने व वापस फैक्ट्रियों को भेजने की बात है तो इसके लिए समय कलेक्टर ही दे सकते हैं। व्यापारी उनसे मिलकर अपनी बात रखें। निगम कलेक्टर के कहने पर ही अपनी कार्रवाई बंद करेगा।
सभी तरह की पॉलीथिन प्रतिबंधित
व्यापारियों ने तर्क दिया कि 40 माइक्रोन की पॉलीथिन पर प्रतिबंध नहीं है, इसलिए उसे बेचने दिया जाए । इस पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य को बैठक में बुलाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पैकिंग व दूध की थैलियों को ही छूट है, बाकी सभी पॉलीथिन प्रतिबंधित हैं। उपायुक्त डागा ने बताया कि माइक्रोन का बहाना करके कोई बच नहीं सकता। इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र हाड़ा, विनोद नायक आदि भी मौजूद थे।
सोमवार को भी दिनभर चली जांच
इस बीच प्रभारी राकेश व्यास के नेतृत्व में दिन भर शहर में जांच अभियान चला। सुबह यहां पैकिंग करने वाली तीन फैक्ट्रियों की जांच की गई। इसके अलावा रामपुरा क्षेत्र से थैलियां जब्त की गईं।
पार्षदों का दावा- पॉलीथिन बंद होने से कचरा हुआ आधा
भास्कर की पहल पर प्रशासन व नगर निगम की ओर से पॉलीथिन के खिलाफ चल रहे अभियान का असर दिखने लगा है। खुद पार्षदों का ही कहना है कि अभियान के असर से वार्ड में कचरा भी कम होने लगा है। पार्षद देवेंद्र चौधरी मामा ने कहा कि उनके वार्ड में पहले जिस प्रकार से कचरे के ढेर लगे रहते थे, उसमें 50 प्रतिशत तक कमी आ गई है। अब सड़कों पर थैलियां बिखरी नहीं दिखाई देतीं। यही बात पार्षद प्रकाश सैनी ने कही। उन्होंने कहा कि भास्कर ने जो अभियान चलाया है, उसका असर अब शहर में दिखाई देने लगा है। पार्षद रमेश आहूजा ने कहा कि हम तो शुरू से ही पॉलीथिन के खिलाफ रहे हैं। जिस प्रकार से अभियान चला है, उसका असर शुरू हो गया है। कचरा तो घरों से निकल रहा है, लेकिन उसमें अब पॉलीथिन नहीं रहती।
नालियां जाम होने और गंदगी की शिकायतें भी हुईं कम
उपायुक्त राजेश डागा ने कहा कि पॉलीथिन कम होने से शहर पूरी तरह साफ सुथरा नजर आने लगा है। अब शहर में सफाई नहीं होने और नालियां जाम होने जैसी शिकायतें नहीं हो रहीं। कार्यवाहक आयुक्त राजेन्द्र सिंह चारण ने कहा कि अभियान का सबसे अधिक असर शहर की सफाई पर पड़ा है। इसमें काफी सुधार हुआ है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai