कोटा होकर गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के कोचों के सभी टाॅयलेट की टंकी में ठेकेदार श्रमिक पानी नहीं भरते। बीते 25 दिनों में ट्रेनों में सफाई नहीं होने व कोचों में पानी नहीं भरने की लगभग 27 शिकायतें रेलवे को मिली हैं। भास्कर ने मंगलवार को जब इसकी पड़ताल की तो कोटा रेलवे स्टेशन पर आने वाली लंबी दूरी की तीन ट्रेनों में से दो ट्रेनों में तीन-तीन ठेकेदार श्रमिक कोचों में पानी भरते मिले।
इतनी ट्रेनें गुजरती है कोटा रेल मंडल से
दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित कोटा रेल मंडल से होकर लगभग 105 ट्रेनें गुजरती और चलती हैं। इन ट्रेनों में से कई लंबी दूरी की होती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में कोटा में पानी भरने की व्यवस्था है। कोच के टाॅयलेट की टंकी में पानी भरने का काम ठेके पर दिया गया है। इसके तहत ठेकेदार को एक शिफ्ट में लगभग 8 कर्मचारी लगाकर कोच के टायलेट की टंकी में पानी भरवाना होता है। लेकिन, बीते कुछ दिनों से ट्रेनों में पानी नहीं भरने की शिकायतें आ रही हैं। 25 दिनों में रेलवे कंट्रोल रूम को जो शिकायतें मिली हंै। उनमें अधिकतर शिकायतें कोच के टायलेट में पानी नहीं भरने की हैं। इनमें कोटा-पटना ट्रेन, सर्वोदय एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में पानी नहीं भरे जाने की है।
क्या कर रहे थे कर्मचारी
इसी प्रकार कोटा-झालावाड़ ट्रेन में सफाई नहीं होने की भी शिकायत है। मंगलवार को जब भास्कर ने प्लेटफार्म पर तीन ट्रेनों जोधपुर-इंदौर, स्वर्ण मंदिर मेल व अवध एक्सप्रेस के कोच के टाॅयलेट की टंकी में पानी भरने की स्थिति को देखा तो जोधपुर-इंदौर व स्वर्ण मंदिर मेल में तीन-तीन श्रमिक ही कोच के टायलेट में पानी भरते दिखे। कम श्रमिक होने के कारण ट्रेन के सभी कोच में पानी नहीं भरा जाता। यात्रियों को रास्ते में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोटा में जब ट्रेनों के टाॅयलेट की टंकी में पानी नहीं भरा जाता तो यात्री हंगामा तक करते हैं। ट्रेन को चेन पुलिंग करके रोक देते हैं। बाद में जब पानी भरा जाता है तभी ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया जाता है। ठेकेदार ने सुधार नहीं किया तो टर्मिनेट होगा ठेका
इन्होंने क्या कहा
सीनियर डीसीएम वाईके चौधरी ने कहा है कि ट्रेनों के शौचालयों की टंकी में ठेकेदार श्रमिक की ओर से पानी नहीं भरने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ठेकेदार को नोटिस जारी किया जा चुका है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि हालात नहीं सुधारे तो ठेका टर्मिनेट किया जा सकता है। इसे लेकर ठेकेदार के खिलाफ जुर्माना भी किया गया है।
इतनी ट्रेनें गुजरती है कोटा रेल मंडल से
दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित कोटा रेल मंडल से होकर लगभग 105 ट्रेनें गुजरती और चलती हैं। इन ट्रेनों में से कई लंबी दूरी की होती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में कोटा में पानी भरने की व्यवस्था है। कोच के टाॅयलेट की टंकी में पानी भरने का काम ठेके पर दिया गया है। इसके तहत ठेकेदार को एक शिफ्ट में लगभग 8 कर्मचारी लगाकर कोच के टायलेट की टंकी में पानी भरवाना होता है। लेकिन, बीते कुछ दिनों से ट्रेनों में पानी नहीं भरने की शिकायतें आ रही हैं। 25 दिनों में रेलवे कंट्रोल रूम को जो शिकायतें मिली हंै। उनमें अधिकतर शिकायतें कोच के टायलेट में पानी नहीं भरने की हैं। इनमें कोटा-पटना ट्रेन, सर्वोदय एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में पानी नहीं भरे जाने की है।
क्या कर रहे थे कर्मचारी
इसी प्रकार कोटा-झालावाड़ ट्रेन में सफाई नहीं होने की भी शिकायत है। मंगलवार को जब भास्कर ने प्लेटफार्म पर तीन ट्रेनों जोधपुर-इंदौर, स्वर्ण मंदिर मेल व अवध एक्सप्रेस के कोच के टाॅयलेट की टंकी में पानी भरने की स्थिति को देखा तो जोधपुर-इंदौर व स्वर्ण मंदिर मेल में तीन-तीन श्रमिक ही कोच के टायलेट में पानी भरते दिखे। कम श्रमिक होने के कारण ट्रेन के सभी कोच में पानी नहीं भरा जाता। यात्रियों को रास्ते में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोटा में जब ट्रेनों के टाॅयलेट की टंकी में पानी नहीं भरा जाता तो यात्री हंगामा तक करते हैं। ट्रेन को चेन पुलिंग करके रोक देते हैं। बाद में जब पानी भरा जाता है तभी ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया जाता है। ठेकेदार ने सुधार नहीं किया तो टर्मिनेट होगा ठेका
इन्होंने क्या कहा
सीनियर डीसीएम वाईके चौधरी ने कहा है कि ट्रेनों के शौचालयों की टंकी में ठेकेदार श्रमिक की ओर से पानी नहीं भरने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ठेकेदार को नोटिस जारी किया जा चुका है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि हालात नहीं सुधारे तो ठेका टर्मिनेट किया जा सकता है। इसे लेकर ठेकेदार के खिलाफ जुर्माना भी किया गया है।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai