यूआईटी ने शहर की महावीर नगर व राजीव गांधी नगर सहित छह प्रमुख कॉलोनियों व 16 कच्ची बस्तियों को नगर निगम के हवाले कर दिया है। पिछले एक महीने से इनसे संबंधित फाइलों को निगम में हस्तांतरित करने का काम चल रहा है। इसे देखते हुए यूआईटी ने इन कॉलोनियों के लिए किसी भी प्रकार का आवेदन लेना बंद कर दिया है।
आवेदकों को कहा जा रहा है कि अब वे इसके लिए निगम में संपर्क करें। यूआईटी की कॉलोनियों व कच्ची बस्ती को निगम में शामिल करने का समझौता 27 अप्रैल-15 को तत्कालीन कलेक्टर जोगाराम की उपस्थिति में हुआ था। इसमें निगम के तत्कालीन सीईओ केसी मीणा व यूआईटी सचिव डॉ. मोहनलाल यादव ने साइन किए थे। हालांकि महापौर महेश विजय ने इस समझौते की पालना से इंकार कर दिया था।
उन्होंने कहा था कि जब तक इन कॉलोनियों के विकास के रूप में यूआईटी द्वारा वसूली गई 15 प्रतिशत की राशि नहीं दी जाती, कॉलोनियों को निगम नहीं लेगा। यह राशि उस समय 130 करोड़ रुपए थी, जो अब लगभग 140 करोड़ हो गई है। इसमें से यूआईटी ने अभी तक लगभग 5 करोड़ का भुगतान नगर निगम को किया है। अब एक माह पहले से इन कॉलोनियों की सभी फाइलें यूआईटी से निगम में आना शुरू हो गई हैं। इसके लिए दो कर्मचारियों को विशेष तौर पर लगाया गया है।
यह कॉलोनियां व कच्ची बस्ती होंगी अब नगर निगम के क्षेत्र में
समझौते के अनुसार राजीव गांधी नगर, महावीर नगर का पूरा क्षेत्र, मोटर मार्केट विस्तार, कैलाशपुरी भदाना, शिवपुरा योजना, केशवपुरा सेक्टर 4, 6, 7 व 9, हनुमान नगर, शिवपुरा, श्याम नगर, अधरशिला, हजीरा बस्ती, दोस्तपुरा, बृजराज कालोनी, आदर्श नगर, केशवपुरा ए, केशवपुरा बी, गांधी नगर ए, गांधी नगर बी, संजय नगर ए व संजय नगर बी, छत्रपुरा तालाब, साजीदेहड़ा, छत्रपुरा कालोनी, नंदा जी की बावड़ी व गिरधरपुरा शामिल हैं।
अब निगम में ही होंगे यह काम
खाली भूखंड का विक्रय, खांचा भूमि विक्रय, भवन निर्माण स्वीकृति, बकाया राशि, लीज राशि वसूली, भू उपयोग परिवर्तन का काम नगर निगम में होगा। इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, बिजली, पानी व अन्य सभी विकास कार्य नगर निगम द्वारा करवाया जाएगा।
एक माह से चल रही स्थानांतरण की प्रक्रिया
उपसचिव दीप्ति रामचंद्र मीणा ने बताया कि पूर्व में हुए फैसले के अनुरूप सभी कॉलोनियों व कच्ची बस्तियों से संबंधित फाइलों को निगम में भेजने का काम एक माह से चल रहा है। वहां के दो कर्मचारी इसमें लगे हुए हैं। यूआईटी केवल आवश्यक काम ही कर रहा है। बाकी के आवेदन नहीं लिए जा रहे। हस्तांतरण पर अब कोई विवाद नहीं है।
फाइलों की लिस्टिंग नहीं हो पा रही
उपमहापौर सुनीता व्यास ने बताया कि समझौते के बाद फाइल पर लिखा गया था कि पहले इन कॉलोनियों के बदले बकाया राशि दी जाए। अन्यथा कॉलोनियों में बिजली-पानी के बिल कौन भुगतेगा। अभी फाइलें निगम में आ रही हैं, इसकी जानकारी मिली है। दो कर्मचारी भी लगाए हुए हैं, लेकिन फाइलों की लिस्टिंग नहीं हो पा रही, आम आदमी इसमें परेशान होगा।
आवेदकों को कहा जा रहा है कि अब वे इसके लिए निगम में संपर्क करें। यूआईटी की कॉलोनियों व कच्ची बस्ती को निगम में शामिल करने का समझौता 27 अप्रैल-15 को तत्कालीन कलेक्टर जोगाराम की उपस्थिति में हुआ था। इसमें निगम के तत्कालीन सीईओ केसी मीणा व यूआईटी सचिव डॉ. मोहनलाल यादव ने साइन किए थे। हालांकि महापौर महेश विजय ने इस समझौते की पालना से इंकार कर दिया था।
उन्होंने कहा था कि जब तक इन कॉलोनियों के विकास के रूप में यूआईटी द्वारा वसूली गई 15 प्रतिशत की राशि नहीं दी जाती, कॉलोनियों को निगम नहीं लेगा। यह राशि उस समय 130 करोड़ रुपए थी, जो अब लगभग 140 करोड़ हो गई है। इसमें से यूआईटी ने अभी तक लगभग 5 करोड़ का भुगतान नगर निगम को किया है। अब एक माह पहले से इन कॉलोनियों की सभी फाइलें यूआईटी से निगम में आना शुरू हो गई हैं। इसके लिए दो कर्मचारियों को विशेष तौर पर लगाया गया है।
यह कॉलोनियां व कच्ची बस्ती होंगी अब नगर निगम के क्षेत्र में
समझौते के अनुसार राजीव गांधी नगर, महावीर नगर का पूरा क्षेत्र, मोटर मार्केट विस्तार, कैलाशपुरी भदाना, शिवपुरा योजना, केशवपुरा सेक्टर 4, 6, 7 व 9, हनुमान नगर, शिवपुरा, श्याम नगर, अधरशिला, हजीरा बस्ती, दोस्तपुरा, बृजराज कालोनी, आदर्श नगर, केशवपुरा ए, केशवपुरा बी, गांधी नगर ए, गांधी नगर बी, संजय नगर ए व संजय नगर बी, छत्रपुरा तालाब, साजीदेहड़ा, छत्रपुरा कालोनी, नंदा जी की बावड़ी व गिरधरपुरा शामिल हैं।
अब निगम में ही होंगे यह काम
खाली भूखंड का विक्रय, खांचा भूमि विक्रय, भवन निर्माण स्वीकृति, बकाया राशि, लीज राशि वसूली, भू उपयोग परिवर्तन का काम नगर निगम में होगा। इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, बिजली, पानी व अन्य सभी विकास कार्य नगर निगम द्वारा करवाया जाएगा।
एक माह से चल रही स्थानांतरण की प्रक्रिया
उपसचिव दीप्ति रामचंद्र मीणा ने बताया कि पूर्व में हुए फैसले के अनुरूप सभी कॉलोनियों व कच्ची बस्तियों से संबंधित फाइलों को निगम में भेजने का काम एक माह से चल रहा है। वहां के दो कर्मचारी इसमें लगे हुए हैं। यूआईटी केवल आवश्यक काम ही कर रहा है। बाकी के आवेदन नहीं लिए जा रहे। हस्तांतरण पर अब कोई विवाद नहीं है।
फाइलों की लिस्टिंग नहीं हो पा रही
उपमहापौर सुनीता व्यास ने बताया कि समझौते के बाद फाइल पर लिखा गया था कि पहले इन कॉलोनियों के बदले बकाया राशि दी जाए। अन्यथा कॉलोनियों में बिजली-पानी के बिल कौन भुगतेगा। अभी फाइलें निगम में आ रही हैं, इसकी जानकारी मिली है। दो कर्मचारी भी लगाए हुए हैं, लेकिन फाइलों की लिस्टिंग नहीं हो पा रही, आम आदमी इसमें परेशान होगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai