20 बाघ और बब्बर शेरों की देखरेख करते थे जानकीलाल, हाथ जोड़कर हुए विदा

20 बाघ और बब्बर शेरों की देखरेख करते थे जानकीलाल, हाथ जोड़कर हुए विदा

20 बाघ और बब्बर शेरों की देखरेख करते थे जानकीलाल, हाथ जोड़कर हुए विदा

कोटा चिड़ियाघर के केयरटेकर जानकीलाल गुरुवार को रिटायर हो गए। इस तरह यहां के बाघ और शेरों से उनका 35 साल पुराना रिश्ता छूट गया। विदा लेते वक्त जानकीलाल भी भावुक हो गए। उन्होंने शेरनी गौरी से हाथ जोड़कर विदा ली। उन्होंने कहा-यहां के बाघ और शेरों को परिवार से भी ज्यादा महत्व दिया है। 24 साल की उम्र से यहां 24-24 घंटे नौकरी की है।

इससे पहले दोपहर को चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से जानकीलाल के विदाई समारोह का आयोजन किया गया। उन्हें शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर अधिकारियों और कर्मचारियों ने विदाई दी। 1980 में चिड़ियाघर में चीतल, मादा भालू, नील गाय की देखभाल से नौकरी शुरू करने वाले जानकीलाल ने 1986 में बाघ और बब्बर शेर के एक-एक जोड़े की देखभाल की। अपने पूरे कॅरिअर के दौरान उन्होंने 14 बाघ और 6 बब्बर शेरों की देखभाल की। खूंखार माने जाने वाले शेरों से उनका ऐसा रिश्ता बन गया था कि वो उनकी आहट पर ही दौड़ पड़ते थे। शेरनी गौरी और बाघ मछंदर को तो उन्होंने अपनी गोद में खिलाया है। 6 महीने की उम्र तक इन्हें गोद में बिठाकर ही दूध पिलाते थे।
बॉयोलॉजिकल पार्क नहीं बनने का दुख
जानकीलाल ने कहा कि यहां नौकरी नहीं की बल्कि एक नौकर बनकर सेवा भाव से काम किया है। प्रदेश सहित देश के अन्य चिड़ियाघर में यहां से वन्यजीव गए हैं। लेकिन यहां की अब कोई सुध नहीं ले रहा है। बायोलॉजिकल पार्क तक नहीं बन पाया है। इनके लिए पार्क बनना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन अधिकारी वीके सालवान ने प्रयास कर उदयपुर से बाघ और उदयपुर से एक जोड़ा बब्बर शेर का लाए थे। जिनका कुनबा बढ़ता गया और आज यहां एक शेरनी और दो बाघ हैं। चिड़ियाघर के इंचार्ज दीपक जासू ने बताया कि अब बाघ और शेरनी की जिम्मेदारी लोगरलाल केयरटेकर को दी है।

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2 Comments

  1. Visitor Photo
    By : Amritlal

    Job

  2. Visitor Photo
    By : Devesh

    Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai

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