मात्र 13 साल की उम्र और कैंसर जैसी घातक बीमारी का दंश। पहले तो डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए। इलाज के लिए डॉक्टर आगे आए तो आर्थिक स्थिति आड़े आ गई। बच्चे में जीने की लालसा और बीमारी से लड़ने का जुनून देख भास्कर की अपील पर शहरवासियों ने भी दिल खोलकर आर्थिक सहयोग दिया।
कोटा के लोगों की सहयोग की बदौलत नागपुर में 7 महीने तक लगातार इलाज चलने के बाद अब बालक स्वस्थ हो गया। डॉक्टरों ने उसे फिट घोषित कर दुबारा पढ़ाई शुरू करने की स्वीकृति दे दी।
बोरखेड़ा निवासी संतोष कोल्हे सेमटेल में ऑपरेटर थे। अचानक फैक्ट्री बंद हो जाने से वह बेरोजगार हो गए। कुछ समय बाद बेटे युवराज को कैंसर जैसी घातक बीमारी ने जकड़ लिया। आम बच्चों की तरह युवराज भी छुट्टियां खत्म होने के बाद 1 अप्रैल को नई क्लास आठवीं में पहली बार स्कूल गया था।
वहां उसकी तबियत खराब हुई और कंधे के नीचे अंगूर के गुच्छों जैसी गांठें उभर आईं। कोटा में डॉक्टर बीमारी तो नहीं पकड़ पाए, लेकिन उसे चंद दिनों का मेहमान बता दिया। नागपुर के एक कैंसर अस्पताल में जांच कराई तो उसे नॉन हुड किंग्स लिमफोमा कैंसर का पता चला। इसमें शरीर में वेंस के भीतर गांठें बनती रहती हैं। इसके बाद युवराज को अस्पताल से 31 दिसंबर को छुट्टी मिली।
धन्यवाद कोटा
स्वस्थ होने के बाद रविवार को भास्कर कार्यालय में पहुंचे युवराज व उनके पिता संतोष ने इसके लिए शहरवासियों का धन्यवाद अदा किया। उन्होंने कहा कि शहरवासियों की वजह से उसे नया जीवन मिला।
स्वस्थ होने के बाद रविवार को भास्कर कार्यालय में पहुंचे युवराज व उनके पिता संतोष ने इसके लिए शहरवासियों का धन्यवाद अदा किया। उन्होंने कहा कि शहरवासियों की वजह से उसे नया जीवन मिला।
7 दिनों में ही आ गए 1.83 लाख रुपए
युवराज के इलाज में शहरवासियों का जबरदस्त सहयोग रहा। पिता अपनी जमा पूंजी इलाज पर खर्च कर चुके थे। आगे इलाज करवाने में वो सक्षम नहीं थे। ऐसे में एनजीओ चलाने वाले पीयूष अग्रवाल को स्कूल से युवराज के बारे में पता चला और वे मदद के लिए भास्कर पहुंचे।
भास्कर ने 5 अगस्त के अंक में उसकी खबर प्रकाशित की। शहरवासी अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करने लगे। समाजसेवी अमर जीव सिंह कोहली ने कलेक्शन का जिम्मा लिया और 7 दिनों में ही 1 लाख 84 हजार 751 रुपए नकद आ गए।
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Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai