तीन माह हो गए साहब। जब से बेटे की बीमारी का पता चला है, यूं समझ लो हम पति-पत्नी सो भी नहीं पा रहे। आंखों में रात कटती है और दिन इलाज की भागदौड़ में बीत जाता है। इलाज इतना महंगा है कि रोजाना खिलाने वाली एक गोली ही 1 हजार रुपए की आ रही है। तीन-चार लाख रुपए खर्च हो चुके। मकान भी बेचना पड़ गया। अब कुछ भी नहीं है मेरे पास... बस, इतना कहते-कहते डीसीएम रोड स्थित वॉम्बे योजना निवासी मूलचंद मालव व उनकी पत्नी सुलोचना रो पड़ते हैं।
कब से है बीमारी
इनके बेटे जतिन (10) को एक ऐसी बीमारी है, जिसके कारण उसमें रक्त व प्लेटलेट नहीं बन पाते। मेडिकल साइंस में इस बीमारी को प्लास्टिक एनीमिया कहते हैं। बीमारी का पता इसी साल 23 फरवरी को तब लगा, जब एक साथ उसे खून की उल्टियां हुईं। बस, तब से जतिन जेके लोन अस्पताल में भर्ती है। हर तीसरे दिन उसे प्लेटलेट व 15 दिन में ब्लड चढ़ाना होता है। रोजाना इंजेक्शन लगते हैं और महंगी दवाइयां आती हैं। कोटा-जयपुर के डॉक्टरों को दिखाया तो पता चला कि सिर्फ एक ही इलाज है बोनमैरो ट्रांसप्लांट। इस पर करीब 10 लाख रुपए का अनुमानित खर्च है। एसएमएस, जयपुर के बोनमैरो ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डॉ. संदीप जसूजा बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हैं, लेकिन पैसों की कमी आड़े आ रही है।
बोनमैरो ट्रांसप्लांट से ही हो सकता है इलाज
कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चे का इलाज कर रहे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस बीमारी में बच्चे में आरबीसी, डब्ल्यूबीसी व प्लेटलेट कुछ भी नहीं बन पाते। एक तरह से बोनमैरो काम करना बंद कर देता है। इसका एकमात्र स्थायी समाधान बोनमैरो ट्रांसप्लांट ही है, जो जयपुर में हो सकता है। स्थानीय स्तर पर अस्थायी इलाज हो रहा है, लेकिन यह बहुत ज्यादा लंबा नहीं चल सकता। इलाज वाकई महंगा है, फिर भी ज्यादातर दवाइयां यहां फ्री मिल जाती हैं और महंगी गोली रोगी को बाजार से खरीदनी पड़ रही है, जो करीब 1 हजार की एक टैबलेट है।
जल्दी पैसे का इंतजाम नहीं हुआ तो जान बचाना मुश्किल
जतिन के पिता मूलचंद ने बताया कि जयपुर में करीब 44 हजार रुपए में पूरे परिवार के अन्य सदस्यों की जांच कराई है। इसमें पत्नी सुलोचना और बड़े बेटे कल्पित की रिपोर्ट आ गई है, मेरी रिपोर्ट आना बाकी है। मैं तीन-चार बार जयपुर होकर आ गया, लेकिन वहां डॉक्टर सिर्फ यही बात कहते हैं कि जल्दी पैसों का इंतजाम करो, ट्रांसप्लांट में कोई अड़चन नहीं है। उन्होंने 10 लाख का एस्टीमेट भी बनाकर दिया है। इसके आधार पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सहायता कोष में भी आवेदन किया है, बता रहे हैं कि वहां से 2-4 लाख की मदद मिल जाएगी। लेकिन इससे इलाज नहीं हो पाएगा।
कब से है बीमारी
इनके बेटे जतिन (10) को एक ऐसी बीमारी है, जिसके कारण उसमें रक्त व प्लेटलेट नहीं बन पाते। मेडिकल साइंस में इस बीमारी को प्लास्टिक एनीमिया कहते हैं। बीमारी का पता इसी साल 23 फरवरी को तब लगा, जब एक साथ उसे खून की उल्टियां हुईं। बस, तब से जतिन जेके लोन अस्पताल में भर्ती है। हर तीसरे दिन उसे प्लेटलेट व 15 दिन में ब्लड चढ़ाना होता है। रोजाना इंजेक्शन लगते हैं और महंगी दवाइयां आती हैं। कोटा-जयपुर के डॉक्टरों को दिखाया तो पता चला कि सिर्फ एक ही इलाज है बोनमैरो ट्रांसप्लांट। इस पर करीब 10 लाख रुपए का अनुमानित खर्च है। एसएमएस, जयपुर के बोनमैरो ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डॉ. संदीप जसूजा बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हैं, लेकिन पैसों की कमी आड़े आ रही है।
बोनमैरो ट्रांसप्लांट से ही हो सकता है इलाज
कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चे का इलाज कर रहे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस बीमारी में बच्चे में आरबीसी, डब्ल्यूबीसी व प्लेटलेट कुछ भी नहीं बन पाते। एक तरह से बोनमैरो काम करना बंद कर देता है। इसका एकमात्र स्थायी समाधान बोनमैरो ट्रांसप्लांट ही है, जो जयपुर में हो सकता है। स्थानीय स्तर पर अस्थायी इलाज हो रहा है, लेकिन यह बहुत ज्यादा लंबा नहीं चल सकता। इलाज वाकई महंगा है, फिर भी ज्यादातर दवाइयां यहां फ्री मिल जाती हैं और महंगी गोली रोगी को बाजार से खरीदनी पड़ रही है, जो करीब 1 हजार की एक टैबलेट है।
जल्दी पैसे का इंतजाम नहीं हुआ तो जान बचाना मुश्किल
जतिन के पिता मूलचंद ने बताया कि जयपुर में करीब 44 हजार रुपए में पूरे परिवार के अन्य सदस्यों की जांच कराई है। इसमें पत्नी सुलोचना और बड़े बेटे कल्पित की रिपोर्ट आ गई है, मेरी रिपोर्ट आना बाकी है। मैं तीन-चार बार जयपुर होकर आ गया, लेकिन वहां डॉक्टर सिर्फ यही बात कहते हैं कि जल्दी पैसों का इंतजाम करो, ट्रांसप्लांट में कोई अड़चन नहीं है। उन्होंने 10 लाख का एस्टीमेट भी बनाकर दिया है। इसके आधार पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सहायता कोष में भी आवेदन किया है, बता रहे हैं कि वहां से 2-4 लाख की मदद मिल जाएगी। लेकिन इससे इलाज नहीं हो पाएगा।
Job
Bhai mera mara hai dard bhi mujko hai